यह पूरा विवाद 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद शुरू हुआ:
आयोजकों की सफाई: सभा के दो दिन बाद कुछ संगठनों ने मैदान में हवन कर गंगाजल छिड़का और इसे शुद्धिकरण बताया। आयोजकों का दावा था कि धार्मिक मंच का इस्तेमाल राजनीतिक बयानों के लिए किया गया और मर्यादा का ध्यान नहीं रखा गया, इसलिए यह प्रक्रिया की गई। इसका जाति से कोई लेना-देना नहीं है।
दलित पहचान से जुड़ा मामला: मल्लिकार्जुन खरगे ने मानसून सत्र के दौरान संसद (राज्यसभा) में यह मुद्दा उठाया और इसे अपनी दलित पहचान से जोड़ते हुए SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की।
बीजेपी-आरएसएस पर आरोप: राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को बीजेपी और आरएसएस की जातिवादी सोच और छुआछूत का प्रतीक करार दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने सामाजिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरा:
वैचारिक संघर्ष: राहुल ने कहा कि देश में आज दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई जारी है—एक तरफ भारत का संविधान है, तो दूसरी तरफ बीजेपी और आरएसएस की सोच।
दलितों के प्रति सोच: उन्होंने कहा कि दलितों पर सदियों से अत्याचार हो रहा है। जब भी कोई दलित आगे बढ़ता है या शीर्ष पद पर पहुंचता है, तो इस तरह की मानसिकता वाले लोग उसे स्वीकार नहीं कर पाते।
पत्रकार वार्ता के दौरान जब एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि संसद मार्च पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस एफआईआर कराने थाने पहुंची थी, तो क्या इस मामले में भी ऐसा ही कोई प्लान है?
इस पर राहुल गांधी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:
इंसाफ की मांग: "देखिए, हमें हमारे अध्यक्ष के लिए इंसाफ चाहिए। जो हल्द्वानी में हुआ है, वह एक अपराध (Crime) है। केंद्र और राज्य सरकार का कर्तव्य है कि खरगे जी को न्याय दिलाएं।"
कार्रवाई नहीं तो रिएक्शन: राहुल गांधी ने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि सरकार उचित कार्रवाई करती है तो ठीक, लेकिन यदि कार्रवाई नहीं की गई तो हमारी तरफ से निश्चित तौर पर इसका रिएक्शन होगा। एवरी एक्शन हैज एन अपोजिट रिएक्शन।"