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"युवाओं के सपनों से खिलवाड़ कर रही है सरकार, राहुल-खड़गे आतंकवादी नहीं थे" : दौसा में बोले सचिन पायलट

 

दौसा, 22 जुलाई। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं को सुनने के बजाय दमन की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कोई अपराध नहीं किया था, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया, जिससे सैकड़ों छात्र घायल हुए और कई अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा और जो अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, उन्हें मुकदमे दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है।

बुधवार को दौसा दौरे के दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के भांडारेज इंटरचेंज पर मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि पिछले दो दिनों में केंद्र सरकार का जो रवैया सामने आया है, उससे स्पष्ट है कि सरकार लाखों-करोड़ों युवाओं के सपनों को कुचलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार घमंड और आक्रामक राजनीति का परिचय दे रही है, जबकि युवाओं को न्याय और रोजगार की जरूरत है।

इससे पहले सचिन पायलट ने मीणा सीमला और मानपुर गांव पहुंचकर दिवंगत कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिजनों से मुलाकात की और शोक संवेदना व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में छात्र आंदोलन, बेरोजगारी और केंद्र सरकार की नीतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

पायलट ने कहा कि कांग्रेस लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है। साथ ही प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने, आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और भविष्य में परीक्षाओं को पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने की मांग भी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है और सवाल पूछने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में बार-बार होने वाले पेपर लीक ने युवाओं का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी के कारण उनका विश्वास टूट रहा है। उन्होंने कहा कि जब युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, परीक्षाएं लगातार विवादों में हैं और उनकी शिकायतें नहीं सुनी जा रहीं, तो आखिर वे अपनी बात किसके सामने रखें।

कांग्रेस नेता ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दोनों वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री आवास के सामने लोक कल्याण मार्ग पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे।

पायलट ने कहा, "राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कोई आतंकवादी नहीं थे। वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे, फिर भी उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।" उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को सड़क पर घसीटा गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है और सरकार की दमनकारी मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए। यदि विपक्ष जनता के मुद्दे उठाता है और सरकार के सामने जवाबदेही की मांग करता है, तो उसे बल प्रयोग या मुकदमों के जरिए दबाना उचित नहीं है। सरकार को छात्रों, युवाओं और विपक्ष की बात सुननी चाहिए तथा समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।

पायलट ने कहा कि कांग्रेस देशभर में युवाओं के हितों की लड़ाई लड़ती रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं, घायलों को उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए, मृतक छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए और भर्ती परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।

उन्होंने कहा कि देश का युवा आज अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी उम्मीदों को टूटने न दे। सरकार को टकराव की राजनीति छोड़कर संवाद और समाधान का रास्ता अपनाना चाहिए, क्योंकि यही लोकतंत्र की असली भावना है।