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राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र: दूसरे दिन केवल 66 मिनट चली कार्यवाही, हंगामे के बीच यूसीसी बिल पेश

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को भी भारी राजनीतिक हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही कुल मिलाकर केवल 1 घंटा 6 मिनट (66 मिनट) ही चल सकी। प्रश्नकाल और शून्यकाल हंगामे की भेंट चढ़ गए। दो बार स्थगन के बाद, जब तीसरी बार सदन शुरू हुआ तो सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) बिल सहित तीन विधेयक और अनुपूरक अनुदान की मांगें पारित करवाईं। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने कार्यवाही का बहिष्कार (बायकॉट) कर दिया, जिसके बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

 

विधानसभा गेट पर विधायकों को रोकने और CJP कार्यकर्ताओं के मुद्दे पर घेराव

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विपक्ष की ओर से आक्रामक रुख अपनाया:

  • गेट पर रोकने का मुद्दा: जूली ने कांग्रेस विधायकों को विधानसभा के मुख्य द्वार पर रोके जाने का मामला उठाते हुए इस पर तुरंत चर्चा कराने की मांग रखी।

  • CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट: विपक्ष ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट की घटना को लेकर भी सरकार को घेरा।

  • प्रश्नकाल में हंगामे की भेंट: जब विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं दी, तो कांग्रेस विधायक वेल में उतर आए। विधायकों ने "सरकार भगोड़ी है" के पोस्टर दिखाए। जवाब में भाजपा विधायकों ने भी राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की।

 

यूसीसी (UCC) बिल पेश, कांग्रेस विधायकों ने किया बॉयकॉट

हंगामे और नारेबाजी के बीच सरकार ने अपने विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया:

  • विधेयक पारित: विपक्ष के विरोध के बीच सदन में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश किया गया। इसके अलावा दो अन्य बिल और अनुपूरक अनुदान की मांगें ध्वनिमत से पारित की गईं।

  • सदन से वॉकआउट: बिल पेश होते ही कांग्रेस विधायक सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए बाहर निकल गए।

 

केवल 66 मिनट चल सकी कार्यवाही, अनिश्चितकाल के लिए स्थगन

मानसून सत्र का दूसरा दिन लगातार व्यवधानों से भरा रहा:

  • समय का ब्योरा: शुक्रवार को प्रश्नकाल मात्र 5 मिनट और शून्यकाल 18 मिनट ही चल पाया।

  • बार-बार स्थगन: हंगामे के कारण अध्यक्ष को दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। तीसरी बार जब सदन शुरू हुआ तो 43 मिनट तक कार्यवाही चलने के बाद, विधायी कार्य पूरे कर सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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