जयपुर: राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव-2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सांगठनिक स्तर पर अपनी तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं। इस बार पार्टी किसी भी प्रकार की सिफारिश या केवल स्थानीय प्रभाव के आधार पर टिकट का वितरण नहीं करेगी। बीजेपी का पूरा ध्यान ऐसे जिताऊ और प्रभावी चेहरों पर है, जिनकी अपने वार्ड या निकाय में मजबूत पकड़ हो और जो पार्टी की जीत की संभावनाओं को बढ़ा सकें।
टिकटों के पारदर्शी और सटीक चयन के लिए पार्टी ने 4-स्तरीय चयन प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है:
चयन प्रक्रिया के पहले चरण में संभावित उम्मीदवारों को सर्वे एजेंसी की कसौटी से गुजरना होगा। एजेंसी के माध्यम से दावेदार की स्थानीय पकड़, जनता में स्वीकार्यता, संगठन में सक्रियता और जीत के समीकरणों का फीडबैक जुटाया जाएगा।
दूसरे चरण में स्थानीय चुनाव प्रभारी और सांगठनिक पदाधिकारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट में वार्ड के जातीय व सामाजिक समीकरण, पिछले चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं के बीच दावेदार की छवि और जनसंपर्क जैसे प्रमुख पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
तीसरे चरण में पार्टी द्वारा नियुक्त प्रभारी और पर्यवेक्षक सीधे मैदान में उतरेंगे। ये नेता स्थानीय स्तर से मिले फीडबैक और सर्वे रिपोर्ट का गहन विश्लेषण करेंगे। पर्यवेक्षकों की यह रिपोर्ट अंतिम चयन के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
अंतिम और चौथे चरण में प्रदेश स्तरीय चुनाव चयन समिति सभी प्राप्त रिपोर्टों पर मंथन करेगी। सर्वे एजेंसी, स्थानीय संगठन और प्रभारी-पर्यवेक्षकों के फीडबैक को ध्यान में रखते हुए समिति प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम फैसला लेगी।