जयपुर: राजस्थान से राज्यसभा की सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी नीरज डांगी ने गुरुवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। नीरज डांगी ने विधानसभा पहुँचकर रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष अपना पर्चा भरा। इस दौरान कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने पार्टी की एकजुटता दिखाने की कोशिश की, हालांकि एक प्रमुख चेहरे की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।
नीरज डांगी के नामांकन के दौरान राजस्थान कांग्रेस का लगभग पूरा शीर्ष नेतृत्व विधानसभा में मौजूद था:
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी: नामांकन के वक्त पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC चीफ) गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली विशेष रूप से मौजूद रहे।
विधायकों का समर्थन: इन प्रमुख नेताओं के अलावा कांग्रेस के कई अन्य विधायकों ने भी नामांकन के दौरान डांगी का साथ दिया।
सचिन पायलट की अनुपस्थिति: नामांकन की पूरी प्रक्रिया के दौरान पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट मौजूद नहीं थे, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र रहा।
विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर नीरज डांगी की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है:
संख्या बल का गणित: वर्तमान समीकरणों के हिसाब से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है।
वोटों की जरूरत: राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 51 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
कांग्रेस की स्थिति: सदन में कांग्रेस के पास कुल 67 विधायक हैं, जो एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पर्याप्त संख्या से काफी ज्यादा हैं।
वहीं भाजपा के लिए दो सीटें जीतना आसान है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे कड़े संघर्ष की जरूरत पड़ेगी:
तीसरी सीट की चुनौती: तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को अन्य दलों के करीब 35 विधायकों के अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी।
गठबंधन और निर्दलीय: आरएलडी (RLD) फिलहाल भाजपा के साथ है। यदि भाजपा 8 निर्दलीय, 2 बसपा और 4 बीटीपी (BTP) विधायकों का समर्थन जुटाने में भी सफल रहती है, तो भी उसे तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए 20 विधायकों के वोटों की कमी खलेगी।
नीरज डांगी को लगातार दूसरी बार राज्यसभा भेजकर कांग्रेस आलाकमान ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है:
परंपरागत वोट बैंक: डांगी को फिर से उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने अपने परंपरागत दलित वोट बैंक को मजबूती से साधने की कोशिश की है।
अंदरूनी समीकरण: जानकारों का मानना है कि नीरज डांगी को लगातार दूसरी बार मौका देना कांग्रेस के भीतर के आपसी सियासी समीकरणों को संतुलित करने के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण कदम है।