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राजस्थान के 309 निकाय प्रमुखों के लिए आरक्षण की लॉटरी जारी: जयपुर, जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर में अनारक्षित रहेंगे मेयर पद

जयपुर: राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों की हलचल के बीच स्वायत्त शासन विभाग (DLB) ने प्रदेश के 309 निकायों में निकाय प्रमुखों (महापौर, सभापति व अध्यक्ष) के पदों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया संपन्न कर ली है। राजधानी जयपुर स्थित विभाग के मुख्यालय में निकाली गई इस लॉटरी के बाद 50 निकाय अनुसूचित जाति (SC), 11 अनुसूचित जनजाति (ST), 60 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 188 निकाय अनारक्षित (General) श्रेणी के लिए तय किए गए हैं।

 

चार प्रमुख नगर निगमों में अनारक्षित रहेगा मेयर पद

प्रदेश के बड़े शहरों में महापौर (मेयर) पद के आरक्षण का गणित साफ हो गया है:

  • जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर: इन चार बड़े नगर निगमों में मेयर का पद अनारक्षित (General) रखा गया है। यहां किसी भी वर्ग का पार्षद चुनाव जीतकर महापौर की कुर्सी पर बैठ सकता है।

  • महिला महापौर की सीटें: अलवर, अजमेर, भीलवाड़ा, भरतपुर और पाली नगर निगमों में महापौर का पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया गया है।

  • कोटा नगर निगम: कोटा में मेयर का पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिला श्रेणी के लिए रिजर्व घोषित किया गया है।

 

17 और 18 अगस्त को जिला स्तर पर निकलेगी वार्डों की लॉटरी

निकाय प्रमुखों के बाद अब पार्षदों और वार्डों के आरक्षण की बारी है:

  • कलेक्टर स्तर पर होगी प्रक्रिया: आगामी 17 अगस्त को जिलों में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी।

  • वार्डों का निर्धारण: यह प्रक्रिया जिला कलेक्टर स्तर पर संपन्न होगी, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के आधार पर वार्डों की स्थिति तय की जाएगी।

  • समय में आ सकता है आंशिक बदलाव: जिला स्तर पर पार्षदों की लॉटरी 17 और 18 अगस्त को निकलने के कारण स्वायत्त शासन विभाग द्वारा न्यायालय में जमा कराई गई चुनावी समयावधि में 1 से 3 दिनों का विस्तार हो सकता है।

 

कोटा की नई सुल्तानपुर पालिका एससी ओपन के लिए रिजर्व

कोटा संभाग में निकायों के आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट हुई है:

  • सुल्तानपुर पालिका: कोटा जिले में नई गठित की गई सुल्तानपुर नगर पालिका को अनुसूचित जाति (SC Open) के लिए आरक्षित किया गया है।

  • ओबीसी महिला मेयर: इसके अलावा कोटा नगर निगम में मेयर का पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित रहने से यहां स्थानीय राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

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