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सचिन पायलट का सरकार पर बड़ा हमला: "हार के डर से चुनाव टाल रही भाजपा"

जयपुर: राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, स्थानीय निकाय चुनावों में देरी और महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर राज्य और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (PCC) में मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि सरकार जनता की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील हो चुकी है।

 

"भाजपा को हार का डर, इसलिए टाले जा रहे चुनाव"

पायलट ने पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर सरकार पर तीखा तंज कसा।

  • अड़चन की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें पैदा की जा रही हैं ताकि चुनाव न हों। सरपंच, पार्षद और मेयर जैसे पद लोकतंत्र की बुनियाद हैं, लेकिन भाजपा हार के डर से इन्हें टाल रही है।

  • जनता की अनदेखी: पायलट ने कहा, "सरकार को न तो कोर्ट की चिंता है और न ही जनता की। नरेगा का काम भी लगभग समाप्त हो चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।"

 

महिला आरक्षण: "आड़ में न हो प्रक्रियाओं से खिलवाड़"

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट करते हुए पायलट ने केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।

  • कांग्रेस की प्रतिबद्धता: पायलट ने याद दिलाया कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने यह बिल पेश किया था, जिसे उस समय भाजपा ने संसद में रोका था।

  • पारदर्शिता की मांग: उन्होंने कहा कि बिल लाने से पहले नियम और प्रक्रियाओं का पालन होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि परिसीमन और जनगणना के आंकड़ों के बिना इसे कैसे लागू किया जाएगा? इसलिए, संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक कर चर्चा होनी चाहिए।

 

कानून-व्यवस्था पर सवाल: "राजधानी का यह हाल तो जिलों का क्या होगा?"

प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए पायलट ने सीधे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए।

  • राजनीतिक हस्तक्षेप: पायलट ने कहा कि जब तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप बंद नहीं होगा, तब तक न्यायपूर्ण कार्रवाई संभव नहीं है।

  • घोषणाएं बनाम धरातल: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सदन में बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन वे जमीन पर उतरती नहीं दिख रही हैं। जयपुर जैसे शहर में सुरक्षा का यह हाल है, तो दूर-दराज के जिलों की स्थिति क्या होगी?

 

जनगणना और परिसीमन पर सुझाव

पायलट ने सुझाव दिया कि सरकार को आगामी जनगणना के परिणामों का इंतजार करना चाहिए। जनगणना के सटीक आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन की चर्चा होनी चाहिए, ताकि सभी वर्गों की महिलाओं को उचित और संवैधानिक तरीके से आरक्षण का लाभ मिल सके।

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