जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय में शनिवार को आयोजित हो रहे 35वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शामिल होने से पहले पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन या हंगामे की आशंका को देखते हुए पुलिस ने एनएसयूआई (NSUI) के दिग्गज छात्र नेताओं को नजरबंद और डिटेन कर लिया है।
समारोह में सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो, इसके लिए पुलिस ने शनिवार सुबह ही कार्रवाई शुरू कर दी।
प्रमुख नाम: एनएसयूआई इकाई अध्यक्ष मनीष मेघवंशी, रामसिंह सामोता और नीरज खीचड़ को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
पुलिस की कार्रवाई: इन नेताओं को फिलहाल जयपुर के गांधी नगर थाने में रखा गया है। छात्रों ने पुलिस की इस कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए सोशल मीडिया पर विरोध के वीडियो भी शेयर किए हैं।
दीक्षांत समारोह को लेकर छात्र नेताओं की नाराजगी पिछले कुछ दिनों से बनी हुई थी।
शेड्यूल पर आपत्ति: छात्रों का आरोप है कि समारोह के मुख्य मंच पर पीएचडी डिग्री दिए जाने का शेड्यूल निर्धारित नहीं किया गया था। छात्र नेताओं ने इसे शोधार्थियों और उनकी डिग्री का अपमान करार दिया।
कल शाम से प्रदर्शन: इसी मांग को लेकर शुक्रवार शाम को भी छात्रों ने कैंपस में जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया था।
पुलिस की इस सख्ती के पीछे शुक्रवार को हुई एक बड़ी घटना को भी वजह माना जा रहा है।
गाड़ी का घेराव: शुक्रवार (24 अप्रैल) को मनीष मेघवंशी के नेतृत्व में छात्रों ने कुलगुरु (VC) की गाड़ी का घेराव करने की कोशिश की थी।
अनोखा विरोध: इस दौरान छात्रों ने कुलगुरु को रोककर उन्हें आरएसएस (RSS) की यूनिफॉर्म भेंट करने की कोशिश की, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच हड़कंप मच गया था।
चूंकि समारोह में उपराष्ट्रपति शिरकत कर रहे हैं, इसलिए पुलिस प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता।
भारी जाब्ता तैनात: विश्वविद्यालय के मुख्य गेट से लेकर दीक्षांत समारोह स्थल तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
सख्ती: छात्र नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सादा वर्दी में भी पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। हालांकि, हिरासत में लिए गए नेताओं को लेकर अभी तक पुलिस ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
हिरासत में लिए गए छात्र नेताओं ने थाने के अंदर से वीडियो संदेश जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि वे केवल अपनी जायज मांगों (पीएचडी डिग्री के सम्मान) के लिए शांतिपूर्ण विरोध करना चाहते थे, लेकिन उन्हें अपराधी की तरह नजरबंद कर दिया गया।