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शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार की 'सद्बुद्धि' के लिए किया यज्ञ; गृहमंत्री को खून से लिख चुके हैं चिट्ठी

बाड़मेर: बाड़मेर के गिरल गांव में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों के समर्थन में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने शनिवार को एक अनोखा कदम उठाया। आंदोलन के डेढ़ महीने और खुद के धरने के 25 दिन पूरे होने पर विधायक भाटी ने धरना स्थल पर ही प्रदेश की भजनलाल सरकार की 'सद्बुद्धि' के लिए बकायदा यज्ञ का आयोजन किया और उसमें आहुतियां दीं।

 

"हे भगवान! सोई हुई सरकार को जगाओ" — यज्ञ के दौरान भाटी की प्रार्थना

शनिवार को धरना स्थल पर मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ वेदी सजाई गई, जिसमें विधायक रविंद्र सिंह भाटी सहित बड़ी संख्या में मजदूर और ग्रामीण शामिल हुए:

  • सद्बुद्धि की कामना: आहुति देते हुए विधायक भाटी ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की, "हे भगवान! इस प्रदेश सरकार को सद्बुद्धि देना, ताकि यह मजदूरों, वंचितों, शोषितों और पीड़ितों की आवाज को सुन सके।"

  • सड़कों पर उतरने की मजबूरी: यज्ञ के बाद मीडिया से बात करते हुए भाटी ने कहा कि वे गिरल माइंस के मजदूरों की समस्याओं को लेकर राजस्थान विधानसभा में भी पुरजोर तरीके से आवाज उठा चुके हैं। लेकिन जब सदन में सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी और मजदूरों को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो उन्हें मजबूरन सदन छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा।

 

45 दिनों से डटे हैं मजदूर, 25 दिनों से साथ बैठे हैं विधायक

गिरल गांव में चल रहा यह आंदोलन कोई नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से सुलग रहा है:

  • लगातार धरना: अपनी जायज मांगों को लेकर गिरल गांव के लोग और प्रभावित मजदूर पिछले करीब डेढ़ महीने (45 दिन) से लगातार आंदोलनरत हैं।

  • विधायक का साथ: मजदूरों के इस संघर्ष को मजबूती देने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी खुद पिछले 25 दिनों से बिना थके धरना स्थल पर ही रात-दिन डटे हुए हैं।

 

कलेक्ट्रेट कूच के दौरान आत्मदाह का प्रयास, वार्ता रही बेनतीजा

इस आंदोलन के दौरान बीते 19 मई को एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल ड्रामा देखने को मिला था:

  • पेट्रोल छिड़कने की घटना: 19 मई को विधायक भाटी के नेतृत्व में हजारों मजदूरों ने बाड़मेर जिला कलेक्ट्रेट का घेराव किया था। प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित होकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह (सुसाइड) करने का प्रयास किया था। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और समर्थकों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें बचाया और कलेक्टर ऑफिस के अंदर ले गए।

  • 5 घंटे की बेनतीजा बातचीत: इसके बाद जिला प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब 5 घंटे तक मैराथन वार्ता चली। हालांकि, प्रशासन के अड़ियल रुख के कारण यह वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही,

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