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सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग, पत्नी पहुंचीं हाईकोर्ट; भूख हड़ताल का 22वां दिन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद अब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में मिल रहे इलाज और वहां की परिस्थितियों पर भरोसा नहीं है तथा यह स्थिति चिकित्सा देखभाल से अधिक "गैरकानूनी नजरबंदी" जैसी प्रतीत होती है।

गीतांजलि आंगमो ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके पति की इच्छा के विरुद्ध उन्हें अस्पताल में रखा गया है और वहां उनकी स्वतंत्र आवाजाही तथा मुलाकातों पर भी प्रतिबंध है। उनका आरोप है कि अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात है, जिससे यह माहौल उपचार केंद्र की बजाय हिरासत जैसा दिखाई देता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि वांगचुक को उनकी पसंद के किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए जाएं।

दिल्ली पुलिस शनिवार तड़के सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद वांगचुक ने अपना आमरण अनशन जारी रखा है। रविवार को उनके अनशन का 22वां दिन है। बताया गया है कि उन्होंने ड्रिप, ओआरएस और दवाएं लेने से भी इनकार कर दिया है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।

सोनम वांगचुक और सीजेपी (CJP) के कार्यकर्ता 28 जून से आमरण अनशन पर हैं। उनकी प्रमुख मांग NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

वांगचुक के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर रविवार को एक संदेश साझा किया गया, जिसमें लिखा गया, "20 जुलाई आजादी का दूसरा आंदोलन है। पेपर लीक जैसे अन्याय से आजादी और मेरी अवैध हिरासत जैसे डर से आजादी।" इस पोस्ट में समर्थकों से लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील भी की गई।

इस बीच, वांगचुक को अस्पताल ले जाने की पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस को शुक्रवार देर रात करीब 1:30 बजे कार्रवाई के निर्देश मिले थे। इसके बाद नई दिल्ली जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंदिर मार्ग थाने में रणनीति बनाई। बताया गया कि इस बात की रिहर्सल भी की गई कि वांगचुक को बिना किसी टकराव के एंबुलेंस तक कैसे पहुंचाया जाए। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग और उसके प्रसार को रोकने के लिए कई एहतियाती कदमों पर विचार किया गया। हालांकि, इन दावों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रविवार को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में गीतांजलि आंगमो ने अपने पति के आंदोलन और उनके जीवन के उद्देश्य पर विस्तार से लिखा। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक कोई सामान्य प्रदर्शनकारी नहीं हैं, बल्कि एक शिक्षक और नवाचार के समर्थक हैं, जिन्होंने पिछले तीन दशकों से बच्चों को जीवन आधारित शिक्षा देने का काम किया है। उनके अनुसार, यह अनशन उनके लंबे सामाजिक और शैक्षणिक मिशन में एक दर्दनाक रुकावट बन गया है।

गीतांजलि ने यह भी लिखा कि अस्पताल में भारी पुलिस मौजूदगी के कारण परिवार और समर्थकों की मुलाकातें सीमित हो गई हैं। उन्होंने इसे चिकित्सा सुविधा से अधिक निगरानी और नियंत्रण की स्थिति बताया तथा कहा कि इस तरह की परिस्थितियां किसी लोकतांत्रिक समाज में चिंता का विषय हैं।

वांगचुक के समर्थन में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने घोषणा की है कि वह रविवार दोपहर तीन बजे जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। इससे पहले शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी वीडियो संदेश जारी कर वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई का विरोध किया था और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया था।

अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाएगा या नहीं। वहीं दूसरी ओर, उनके लगातार जारी आमरण अनशन और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक भोजन और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता से इनकार करने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में अदालत, प्रशासन और चिकित्सा संस्थानों के सामने वांगचुक की सेहत और उनके अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।