राजस्थान विधान सभा के 75वें वर्ष पर अमृत महोत्सव
1. अत्यंत हर्ष, गौरव और ऐतिहासिक आत्मसंतोष का विषय है कि जन-आकांक्षाओं की संवाहिका और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षक, हमारी अपनी राजस्थान विधान सभा अपने गौरवशाली कार्यकरण के 75 वर्ष पूर्ण कर अमृत महोत्सव मना रही है।
2. विगत सात दशकों की इस यात्रा में मरुधरा के विकास, सामाजिक समरसता और बुनियादी सुधारों को गति देने में सदन के प्रत्येक कालखंड के माननीय सदस्यों का योगदान अमूल्य और अविस्मरणीय रहा है।
3. इस ऐतिहासिक अवसर को स्मरणीय बनाए रखने हेतु दिनांक 15 जुलाई, 2026 को विधान सभा के सदन में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
4. इस समागम का मुख्य उद्देश्य अनुभवों को साझा करने के साथ-साथ विभिन्न विधान सभाओं के कार्यकाल के दौरान पारित उन ऐतिहासिक एवं जनहितैषी कानूनों पर चर्चा करना है, जिन्होंने राजस्थान नवनिर्माण की मजबूत आधारशिला रखी।
5. इस ऐतिहासिक समागम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में लोक सभा के माननीय अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी तथा समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य सभा के सभापति एवं भारत के माननीय उपराष्ट्रपति महोदय श्री सी.पी. राधाकृष्णन अपनी गरिमामयी उपस्थिति से हमें अनुगृहीत करेंगे। इसके अतिरिक्त अन्य विशिष्ट अतिथिगण माननीय राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री भी इस समारोह का हिस्सा बनेंगे।
6. संसदीय लोकतंत्र के इस महाकुंभ में अतीत के संस्मरणों को जीवंत करेगी, बल्कि भविष्य के विधायी मार्ग को भी आलोकित करेगी।
7. राजस्थान विधान सभा के इस 75वें वर्ष में चार बड़े कार्यक्रम होंगे। एक वर्ष तक चलने वाला इस अमृत महोत्सव के तहत होने वाले समारोह ऐतिहासिक और गौरवशाली होगे। यह उत्सव विधायिका को समर्पित होगा। समारोह की विशिष्टता के अनुरूप देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष को आमंत्रित किया जा रहा है।
8. कार्यक्रम में संसदीय और संविधान विशेषज्ञों के विशेष सत्र होंगे।
9. यह अमृत महोत्सव लोकतंत्र के इतिहास, वर्तमान और भविष्य को एक सूत्र में जोड़ने वाला ऐसा राष्ट्रीय आयोजन होगा, जिसमें अनुभव, परंपरा, नवाचार, महिला, युवा ऊर्जा और जनविश्वास एक साथ दिखाई देंगे। यह आयोजन भारतीय संसदीय लोकतंत्र का गौरवशाली उत्सव होगा।
10. आगामी 15 जुलाई को अमृत उत्सव का प्रथम कार्यक्रम है। इसमे राजस्थान की पहली से सोलहवीं विधान सभा तक के पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों का विशाल सम्मलेन होगा। इसमें लोकतंत्र की ऐतिहासिक यात्रा को जीवंत किया जाएगा। इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण एवं उत्कृष्ट कानूनों, सामाजिक परिवर्तनकारी निर्णयों और संसदीय परंपराओं की समीक्षा की जाएगी। समारोह में पूर्व विधान सभा अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और वरिष्ठतम सदस्यों का विशेष सम्मान होगा। लोकतंत्र के सफर के अनुभव और चुनौतियों, विधायी विरासत, सदन की गरिमा और विधान सभा के डिजिटल रुपान्तरण पर भी सम्मेलन में चर्चा होगी।
11. समारोह का सजीव प्रसारण राजस्थान विधान सभा के यूटयूब चैनल पर होगा।
12. राजस्थान की विभिन्न विधान सभाओं में पारित 23 कानूनों पर पूर्व स्पीकर, पूर्व डिप्टी स्पीकर, पूर्व मंत्रीगण चर्चा करेंगे।
13. इस एक दिवस के कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सत्रों में राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्गृहण अधिनियम, 1952, राजस्थान जमींदारी एवं बिस्वेदारी उन्मूलन अधिनियम, 1959, राजस्थान कृषि लगान नियंत्रण अधिनियम, 1954, राजस्थान अभिधृति अधिनियम, 1955, राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद् अधिनियम, 1959, राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964, राजस्थान विधान सभा सदस्य (निर्हरता निवारण) अधिनियम, 1969, राजस्थान लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम, 1973, राजस्थान कृषि जोतों पर अधिकतम सीमा अधिरोपण अधिनियम, 1973, राजस्थान पासबुक (कृषि जोत) अधिनियम, 1983, राजस्थान गौशाला अधिनियम, 1958, राजस्थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्थाई प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 1995, राजस्थान अत्यावश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम, 1970 और राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी विधेयक, 2011 कानूनों पर चर्चा कराई जायेगी।
14. इसी प्रकार राजस्थान राजवित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2005, राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012, राजस्थान प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023, राजस्थान कोचिंग सेन्टर (नियंत्रण और विनियमन) अधिनियम, 2025, राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025, राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2001, राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम, 1965, राजस्थान भूदान यज्ञ अधिनियम, 1953 और राजस्थान ग्रामदान अधिनियम, 1971 कानूनों पर भी चर्चा कराई जायेगी।
15. समारोह में पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों, छह बार या इससे अधिक बार तक के विधायकगणों और वर्तमान विधायकगणों का सम्मान किया जायेगा।
16. पूर्व विधान सभा अध्यक्षों में श्री शांतिलाल चपलोत, श्रीमती सुमित्रा सिंह, श्री दीपेन्द्र सिंह शेखावत, श्री कैलाश चन्द मेघवाल और डॉ. सी.पी. जोशी, पूर्व उपाध्यक्षों में श्रीमती तारा भण्डारी, श्री रामनारायण मीणा और श्री राव राजेन्द्र सिंह को सम्मानित किया जायेगा।
17. छह या इससे अधिक बार के पूर्व विधायकगणों में श्रीमती सुमित्रा सिंह (9 बार) 96 वर्ष, श्री गुलाब चन्द कटारिया (8 बार) - 82 वर्ष, श्री प्रद्युम्न सिंह (8 बार) 89 वर्ष, श्री नारायण सिंह (7 बार) -92 वर्ष, श्री देवी सिंह भाटी (7 बार) 80 वर्ष, श्री राजेन्द्र राठौड़ (7 बार) 71 वर्ष, श्री कैलाश चन्द मेघवाल (6 बार) 92 वर्ष, श्री फतेह सिंह (6 बार) 87 वर्ष, श्री घनश्याम तिवाड़ी (6 बार) 78 वर्ष, श्री हेमाराम चौधरी (6 बार) 78 वर्ष, डॉ. बी.डी. कल्ला (6 बार) 76 वर्ष, श्री महादेव सिंह (6) बार) 76 वर्ष, श्री परसराम मोरदिया (6 बार) 75 वर्ष और श्री परसादीलाल मीणा (6 बार) 75 वर्ष को सम्मानित किया जायेगा।
18. वर्तमान विधायकगणों में श्री कालीचरण सराफ (8 बार), डॉ. दयाराम परमार (7 बार), श्री प्रताप सिंह सिंघवी (7 बार), श्री राजेन्द्र पारीक (6 बार), श्री अशोक गहलोत (6 बार), डॉ. किरोड़ी लाल (6 बार), श्रीमती वसुन्धरा राजे (6 बार), श्री श्रवण कुमार (6 बार), श्री मदन दिलावर (6 बार) और श्री पुष्पेन्द्र सिंह (6) बार) को सम्मानित किया जायेगा ।
19. राजस्थान के लिए यह ऐतिहासिक और गौरवशाली अवसर है। मीडिया से मेरा अनुरोध है कि इस कार्य में हमारा सहयोग करें और मनोबल बढ़ाये ताकि हम सभी मिलकर इन गौरवशाली पलों को स्मरणीय बना सकें।