World

Orion spacecraft कैप्सूल को लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा (Earth Orbit) में स्थापित किया जाता है।

आर्टेमिस-2 मिशन अब चंद्रमा की ओर अग्रसर है, ओरियन कैप्सूल ने लॉन्च के एक दिन बाद शुक्रवार सुबह 5:19 बजे पृथ्वी की कक्षा छोड़कर थ्रस्टर्स फायर किए. इस प्रक्रिया को 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न' कहा जाता है, जो लगभग 6 मिनट तक चला और यान की गति को 22,000 मील प्रति घंटा (लगभग 34 हजार किमी/घंटा) तक बढ़ा दिया.

अब आर्टेमिस-2 'फ्री-रिटर्न ट्रेजैक्टरी' पर है, जिसका अर्थ है कि यह न्यूटन के गति के पहले नियम के आधार पर आगे बढ़ रहा है, और इंजन केवल छोटे-मोटे सुधारों के लिए ही फायर किए जाएंगे. आर्टेमिस डेवलपमेंट हेड डॉ. लोरी ग्लेज ने पुष्टि की है कि अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह स्वस्थ हैं और स्पेसक्राफ्ट उम्मीद के मुताबिक बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि यह एक टेस्ट फ्लाइट है और टीम स्पेसक्राफ्ट के बारे में अधिक से अधिक जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है. अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ओरियन कैप्सूल के टॉयलेट में आ रही शुरुआती दिक्कतों को ठीक करने में व्यस्त रही हैं, उन्होंने खुद को "स्पेस प्लंबर" बताया. कमांडर रीड वाइसमैन ने अंतरिक्ष में सोने को मजेदार बताया और पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने के अनुभव को अविस्मरणीय कहा.

मिशन के पांचवें दिन तक, पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी, लेकिन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करते ही इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी. छठे दिन, ओरियन चंद्रमा की सतह से केवल 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा, जिससे अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के उस हिस्से को देख पाएंगे जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता. इस दौरान, जब ओरियन चंद्रमा के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी से उसका संपर्क लगभग 50 मिनट तक 'कम्युनिकेशन ब्लैकआउट' में रह सकता है. इसी दिन, यह अपोलो 13 द्वारा 1970 में बनाए गए धरती से सबसे ज्यादा दूरी के 400,171.18 किमी के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है, आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी की दूरी तक पहुंचने की उम्मीद है.

सातवें दिन, यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा, चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल 'गुलेल' की तरह करके यह यान को पृथ्वी की ओर धकेल देगा. पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री लगभग 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे. भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और 6:36 बजे सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा. इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी.