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अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष का 20वां दिन: ईरान के रास लफान गैस प्लांट हमले के बाद 12 मुस्लिम देशों ने जताई नाराजगी

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 20वां दिन है. ईरान ने बुधवार को कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट 'रास लफान' पर हमला किया था, जिसके बाद आज 12 मुस्लिम देशों ने ईरान के खिलाफ नाराजगी जताई है. इन देशों ने ईरान से तुरंत हमले रोकने को कहा है. यह बयान सऊदी की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद सामने आया, जिसमें सऊदी अरब, कतर और UAE समेत कई देश शामिल थे. इन देशों ने कहा कि ईरान रियाहशी इलाकों पर हमला कर रहा है, जो गलत है और इसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता.

सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के पास ईरान को जवाब देने की पूरी ताकत है और ईरान के हमले पहले से प्लान किए गए लगते हैं. उन्होंने ईरान से सऊदी के सब्र का इम्तिहान न लेने को कहा.

वहीं, अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा है कि ईरान ने अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम फिर से शुरू नहीं किया है. उनके मुताबिक, पिछले साल जून के हमलों के बाद ईरान की यह ताकत लगभग खत्म हो गई थी. यह बात राष्ट्रपति ट्रम्प के दावों से अलग है, जो कहते रहे हैं कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम खतरा है और इसी वजह से हाल का युद्ध जरूरी था. गबार्ड ने यह भी कहा कि 2025 में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने इसे दोबारा शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की. डेमोक्रेटिक नेता मार्क वार्नर ने कहा कि गबार्ड ने अपनी बात का वह हिस्सा सार्वजनिक रूप से नहीं बताया, जो ट्रम्प की बात से अलग था. ईरान पहले से कहता आया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा और कुछ एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि ईरान से तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं है.

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) पर भी नाराजगी जताई है. ईरान का कहना है कि उसके बड़े अधिकारियों की हत्या पर UN चुप है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने सुरक्षा परिषद को चिट्ठी लिखकर यह शिकायत की है. उन्होंने कहा कि UN की चुप्पी की वजह से इजराइल और ज्यादा हिम्मत से ऐसे हमले कर रहा है और अगर इसे रोका नहीं गया, तो ऐसे हमले आम हो सकते हैं और दूसरे देशों तक भी फैल सकते हैं.

इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उन्होंने कतर के अमीर और डोनाल्ड ट्रम्प से बात की है. उन्होंने गैस और पानी जैसी जरूरी चीजों पर हमले तुरंत बंद करने की बात कही और आम लोगों की सुरक्षा को सबसे जरूरी बताया. इस पर तंज करते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि मैक्रों ने इजराइल और अमेरिका के ईरान पर हमलों की निंदा नहीं की, उन्हें चिंता तब हुई जब ईरान ने जवाब दिया.

इजराइल में पिछले 24 घंटों में 177 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है. सरकार के मुताबिक, अब तक इस युद्ध में कुल 3,924 लोग घायल हो चुके हैं, जबकि 15 लोगों की मौत भी हो चुकी है. इसके अलावा लेबनान में 2 इजराइली सैनिक भी मारे गए हैं. मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों ने ईरान के हमलों की कड़ी आलोचना की है. इन देशों ने ईरान से तुरंत हमले बंद करने और हालात को और खराब न करने को कहा है. साथ ही उन्होंने इजराइल की लेबनान में कार्रवाई की भी आलोचना की है.