जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित 'साउथ वेस्टर्न कमांड' में गुरुवार को भारतीय सैन्य शक्ति का भव्य संगम देखने को मिला। 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में सेना ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति को दोहराया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सेना ने पहली बार ऑपरेशन के प्रभाव के बड़े आंकड़े साझा किए-
बड़ा प्रहार: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार टेररिस्ट कैंपों में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए।
पाकिस्तानी सेना को चोट: इस कार्रवाई में पाकिस्तान के 100 से ज्यादा जवान भी ढेर हुए।
ऐतिहासिक अभियान: इसे पिछले कई दशकों में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत का सबसे व्यापक और प्रभावी सैन्य अभियान बताया गया।
सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत की रणनीति अब रक्षात्मक के बजाय आक्रामक और निर्णायक है:
स्पष्ट संदेश: ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान के भीतर स्थित कोई भी आतंकी लॉन्च पैड अब भारत की पहुंच से दूर नहीं है।
संकल्प: अधिकारियों ने कहा, "पहलगाम हमले में खोए हुए साथियों को हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भविष्य में कोई ऐसा साहस न करे।"
पूरी छूट: सेना को ऑपरेशन के लिए सरकार की ओर से पूरी स्वायत्तता और छूट दी गई थी।
इस खास मौके पर भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के वही दिग्गज अधिकारी शामिल हुए जिन्होंने ऑपरेशन के समय कमान संभाली थी:
लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला: डिप्टी चीफ (ऑपरेशन), इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई: डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (DGMO)।
एयर मार्शल अवधेश कुमार: डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशन।
वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद: डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशन।
सेना ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' केवल एक घटना नहीं, बल्कि भारत की नई सैन्य विचारधारा की शुरुआत थी। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को तब तक जारी रखेगा जब तक सीमा पार से चलने वाली आतंक की फैक्ट्रियां पूरी तरह नष्ट नहीं हो जातीं। जयपुर का साउथ वेस्टर्न कमांड आज इस शौर्य गाथा की यादों और भविष्य के संकल्पों का साक्षी बना।