World

PM मोदी के पंजाब दौरे से पहले फिरोजपुर रेलवे स्टेशन पर खालिस्तानी नारे, SFJ के वीडियो के बाद हाई अलर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे से पहले फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। यह वीडियो प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से जारी किया गया है। वीडियो में दिल्ली जाने वाली एक ट्रेन के डिब्बों पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘मोदी मुर्दाबाद’ जैसे नारे लिखे हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस स्टेशन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और उन लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर रात के समय ट्रेन के डिब्बों पर ये नारे लिखे। घटना के बाद फिरोजपुर सहित आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने यह वीडियो जारी करते हुए पंजाब में आतंकवाद के दौर के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का जिक्र किया। पन्नू ने कथित एनकाउंटर और मानवाधिकार से जुड़े पुराने मामलों को उठाने की कोशिश की। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पंजाब दौरा प्रस्तावित है। पीएम 15 और 17 जुलाई को लुधियाना और जालंधर जा सकते हैं। इस दौरान कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन प्रस्तावित है। जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन की नई इमारत का उद्घाटन भी कार्यक्रम में शामिल बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?

जसवंत सिंह खालड़ा अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में डायरेक्टर थे और शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार विंग से जुड़े हुए थे। 1990 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के दौर के दौरान उन्होंने कथित फर्जी मुठभेड़ों और लापता लोगों के मामलों की जांच की थी।

बताया जाता है कि उनके सहयोगी प्यारा सिंह के अचानक गायब होने के बाद खालड़ा ने उनकी तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें अमृतसर के श्मशान घाटों पर बड़ी संख्या में लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किए गए शवों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने कथित फर्जी एनकाउंटर मामलों की पड़ताल शुरू की।

जसवंत सिंह खालड़ा और उनके सहयोगी जेएस ढिल्लो ने 1995 में एक प्रेस नोट जारी किया था, जिसमें पंजाब पुलिस द्वारा कथित रूप से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख किया गया था। इस रिपोर्ट के कुछ महीनों बाद सितंबर 1995 में खालड़ा के लापता होने का मामला सामने आया था। बाद में यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना।

क्या है सिख फॉर जस्टिस (SFJ)?

सिख फॉर जस्टिस यानी SFJ एक अलगाववादी संगठन है, जो भारत से अलग खालिस्तान बनाने की मांग करता है। संगठन की स्थापना 2007 में अमेरिका में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने की थी। SFJ ने ‘रेफरेंडम 2020’ नाम से अभियान चलाने की घोषणा की थी, जिसमें पंजाब को भारत से अलग करने को लेकर जनमत संग्रह की बात कही गई थी।

भारत सरकार ने साल 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत SFJ पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का आरोप है कि संगठन अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के खिलाफ काम करता है।

साल 2020 में केंद्र सरकार ने गुरपतवंत सिंह पन्नू को भी UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। उस पर अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं को उकसाने के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा सरकार ने SFJ से जुड़े कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चैनलों पर भी कार्रवाई की थी।

फिलहाल फिरोजपुर रेलवे स्टेशन से जुड़े मामले में सुरक्षा एजेंसियां वीडियो की सत्यता, इसमें शामिल लोगों और घटना के पीछे की साजिश की जांच कर रही हैं। प्रधानमंत्री के प्रस्तावित पंजाब दौरे को देखते हुए पुलिस और खुफिया एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।