राहुल गांधी ने पीएम मोदी की उन अपीलों को कोट किया जिनमें जनता से त्याग करने की बात कही गई थी। राहुल ने लिखा:
नाकामी का सबूत: "कल मोदी जी ने जनता से त्याग मांगा—सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और तेल का उपयोग घटाओ। ये उपदेश नहीं, विफलता हैं।"
जनता पर दबाव: राहुल ने कहा कि 12 साल के शासन के बाद देश को ऐसे मुकाम पर ला दिया गया है जहां सरकार जनता को बता रही है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहां जाना चाहिए।
जवाबदेही से भागना: उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार सरकार अपनी विफलताओं की जिम्मेदारी जनता पर डाल देती है ताकि खुद की जवाबदेही से बच सके।
रविवार (10 मई 2026) को सिकंदराबाद की एक जनसभा में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट (जैसे यू.एस.-ईरान युद्ध) के कारण बढ़ते तेल के दामों और विदेशी मुद्रा भंडार के दबाव का हवाला देते हुए नागरिकों से सात प्रमुख अपीलें की थीं:
ईंधन की बचत: अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें, मेट्रो और कारपूलिंग का सहारा लें।
वर्क फ्रॉम होम: पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए दफ्तरों को फिर से वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाना चाहिए।
सोने की खरीद पर रोक: देशहित में कम से कम एक साल तक नया सोना खरीदने से बचें ताकि विदेशी मुद्रा बचे।
विदेश यात्रा टालें: छुट्टियां या शादियों के लिए विदेश जाना फिलहाल स्थगित करना देशहित में होगा।
खाने के तेल में कटौती: आयात पर निर्भरता कम करने के लिए खाने के तेल का इस्तेमाल घटाएं।
प्राकृतिक खेती: रासायनिक उर्वरकों (Fertilizers) की खपत आधी कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।
स्वदेशी को बढ़ावा: विदेशी ब्रांडेड उत्पादों के बजाय स्थानीय (Local) उत्पादों को प्राथमिकता दें।
राहुल गांधी ने अपने हमले को और तेज करते हुए प्रधानमंत्री को 'कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम' करार दिया। उन्होंने कहा कि 12 साल में देश की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि अब प्रधानमंत्री के पास स्थिति को संभालने का कोई ठोस प्लान नहीं है, इसलिए वे लोगों से त्याग मांग रहे हैं। कांग्रेस ने इसे 'अनैतिक और लापरवाह' कदम बताते हुए कहा कि सरकार को वैश्विक संकट से निपटने के लिए आकस्मिक योजना (Contingency Plan) बनानी चाहिए थी, न कि जनता को असुविधा में डालना चाहिए।
पीएम मोदी ने अपनी जनसभा में इन अपीलों को 'देशभक्ति का एक रूप' बताया था, लेकिन विपक्षी दलों के कड़े रुख के बाद अब इस पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।