विदेश मंत्रालय के अनुसार, हमले का शिकार बने दोनों व्यापारिक जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। इनमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। मंत्रालय ने मृतक के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारतीय मिशन प्रभावित नाविकों और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है, ताकि आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
भारत ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, हिंसा रोकने तथा संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इस बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर लंबी अवधि तक हवाई हमले किए। इनमें बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनार्क, अबू मूसा और बंदर अब्बास क्षेत्र के सैन्य प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। इन हमलों के बाद क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके बदले प्रत्येक कार्गो जहाज से 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों पर नई पाबंदियों की भी घोषणा की है। इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
ईरान ने ट्रम्प के इस प्रस्ताव का कड़ा जवाब दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी वर्षों से ईरान निभाता आया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 20 प्रतिशत शुल्क बहुत अधिक है और यदि सुरक्षा के बदले कोई शुल्क लिया जाना है तो वह उचित और न्यायसंगत होना चाहिए।
तनाव के बीच अमेरिका ने बंदर अब्बास स्थित ईरान के नौसैनिक अड्डों और पनडुब्बी रखरखाव केंद्रों पर भी कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की नौसैनिक क्षमता को कमजोर करना है। दूसरी ओर, ऐसी भी खबरें सामने आई हैं कि रूस का विशेष कमांड विमान तेहरान पहुंचा है, जिसे बड़े सैन्य संकट या परमाणु संघर्ष की स्थिति में उच्चस्तरीय कमांड सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।