चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को डीएमके (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर फिर से हमला बोला। उन्होंने न केवल सनातन को 'मिटाने' की बात कही, बल्कि नवनियुक्त मुख्यमंत्री विजय (Thalapathy Vijay) के शपथ ग्रहण समारोह में हुए 'प्रोटोकॉल उल्लंघन' का मुद्दा उठाकर क्षेत्रीय गौरव की राजनीति को भी हवा दी।
मंगलवार को सदन को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा:
विभाजनकारी विचारधारा: "सनातन धर्म, जो लोगों को आपस में बांटता है, उसे निश्चित रूप से खत्म (Eradicate) किया जाना चाहिए।"
सुप्रीम कोर्ट और पुराना बयान: गौरतलब है कि उदयनिधि ने 2023 में सनातन की तुलना 'डेंगू और मलेरिया' से की थी। इस मामले में मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 'गैर-जिम्मेदाराना' टिप्पणियों के लिए फटकार भी लगाई थी, लेकिन उदयनिधि ने एक बार फिर सदन में उसी विचारधारा को दोहराया है।
उदयनिधि ने 10 मई को हुए मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गान (तमिल थाई वाझथु) की उपेक्षा का आरोप लगाया:
तीसरे स्थान पर धकेला: उदयनिधि ने कहा कि परंपरा के अनुसार 'तमिल थाई वाझथु' को सबसे पहले बजाया जाना चाहिए था, लेकिन इसे 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' के बाद तीसरे स्थान पर रखा गया।
चेतावनी: उन्होंने सदन में कहा, "यह एक गलती थी और भविष्य में हम अपनी परंपराओं और अधिकारों के साथ ऐसा समझौता बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
समारोह में 'वंदे मातरम' को प्राथमिकता दिए जाने पर उदयनिधि ने गवर्नर राजेंद्र आर्लेकर पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गवर्नर ने केंद्र के नए दिशा-निर्देशों का हवाला देकर जानबूझकर तमिल राज्य गीत को पीछे धकेला है। सहयोगी दलों (CPI और VCK) ने भी इसे 'क्षेत्रीय पहचान का अपमान' बताया है।
अपने बयानों का बचाव करते हुए उदयनिधि ने कहा कि तमिलनाडु में पिछले 100 सालों से सनातन के खिलाफ आवाज उठ रही है। उन्होंने कहा:
सामाजिक सुधार: "अतीत में बाबासाहेब अंबेडकर और पेरियार ने भी सनातन का विरोध किया था। इसी कड़े विरोध के कारण आज महिलाएं घर से बाहर निकल पा रही हैं और सती जैसी कुरीतियां खत्म हुई हैं।"
DMK का आधार: उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके की स्थापना ही सामाजिक बुराइयों और विभाजनकारी प्रथाओं के विरोध के सिद्धांतों पर हुई है।
नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री विजय और स्पीकर जेसीडी प्रभाकर की ओर इशारा करते हुए उदयनिधि ने हल्के अंदाज में कहा, "शासन के मामले में हम सीनियर बैच हैं और हम आपको सिखाने के लिए तैयार हैं।" इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद मुख्यमंत्री विजय भी मुस्कुराते नजर आए। विधानसभा चुनाव में टीवीके (TVK) के हाथों मिली हार के बाद, उदयनिधि स्टालिन का यह आक्रामक रुख राज्य में एक बार फिर 'द्रविड़ बनाम सनातन' और 'क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय' की जंग को तेज कर सकता है।