चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग के साथ-साथ राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार मामले की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करेगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में केवल जांच की प्रगति ही नहीं, बल्कि SIT के गठन, उसकी संरचना, उसमें शामिल अधिकारियों और जांच की वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण होना चाहिए।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित करते हुए कहा कि जांच की प्रगति का मूल्यांकन स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मामले में SIT के गठन के बाद कई घटनाक्रम हुए हैं और आशंका है कि मंदिर परिसर से जुड़े CCTV फुटेज नष्ट किए जा सकते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सभी संबंधित CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी अनुरोध किया कि स्टेटस रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाए। हालांकि चीफ जस्टिस ने कहा कि फिलहाल जांच जारी है और इस मुद्दे पर उचित समय पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता की ओर से लगातार विभिन्न मुद्दे उठाए जा रहे थे, तब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "अपनी ऊर्जा बचाकर रखें, आपको बाहर भी इसकी जरूरत पड़ेगी।" अदालत की इस टिप्पणी के बाद सुनवाई आगे बढ़ी।
वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित है, इसलिए अलग से नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं हो सकती। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला बरकरार रखा।
मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय कुमार राय ने अदालत के बाहर कहा कि वर्तमान में जांच स्थानीय स्तर पर सर्कल ऑफिसर और राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन के अधिकारियों द्वारा की जा रही है। उनके अनुसार उन्हें ऐसा नहीं लगता कि वास्तविक जांच SIT कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि SIT के गठन और उसकी वैधानिक स्थिति को लेकर कुछ कानूनी जटिलताएं भी मौजूद हैं, जिन पर अदालत के समक्ष विस्तार से पक्ष रखा जाएगा।
उधर अयोध्या पुलिस इस मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश करेगी। आरोपियों की पुलिस रिमांड समाप्त हो रही है। पुलिस मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के करीबी बताए जा रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू तथा चढ़ावा गिनती के प्रभारी रहे सुभाष श्रीवास्तव की सात दिन की अतिरिक्त रिमांड की मांग कर सकती है।
इससे पहले पुलिस आरोपी अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को फिलहाल फैजाबाद जेल की अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ के आधार पर चोरी की साजिश, धन के प्रवाह और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
इसी बीच अयोध्या स्थित साकेत भवन के महंत आचार्य सीताराम दास महाराज ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केजरीवाल न तो कोई न्यायिक और न ही संवैधानिक प्राधिकारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग समय-समय पर राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे मामलों पर बयानबाजी करते हैं और इसे अनुचित बताया।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। अदालत द्वारा मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट और SIT के गठन से जुड़ी जानकारी अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि जांच राज्य पुलिस की SIT के माध्यम से आगे बढ़ेगी या याचिकाकर्ताओं की मांग के अनुसार CBI जांच पर भी अदालत कोई विचार करेगी। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजरें 20 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।