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जोधपुर: सिजेरियन के बाद बिगड़ी प्रसूताओं की तबीयत, अब 8 महिलाओं का इलाज जारी

जोधपुर के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की बिगड़ती सेहत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। पहले पांच प्रसूताओं के इलाज की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कुल आठ महिलाओं का उपचार चल रहा है। इनमें से तीन प्रसूताओं की किडनी प्रभावित हुई है, जबकि अन्य महिलाओं का इलाज विभिन्न जटिलताओं के चलते किया जा रहा है। सभी मरीज फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

मेडिकल कॉलेज की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पांच प्रसूताओं का इलाज उम्मेद अस्पताल में चल रहा है, जबकि तीन महिलाओं को महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती किया गया है। महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती एक महिला पिछले 24 दिनों से वेंटिलेटर पर है और उसका नियमित डायलिसिस किया जा रहा है।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती तीन प्रसूताओं की किडनी प्रभावित हुई है। वहीं उम्मेद अस्पताल में भर्ती अन्य महिलाओं को उच्च रक्तचाप (बीपी), अत्यधिक रक्तस्राव और दौरे (फिट्स) जैसी समस्याएं हैं। सभी मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सरोज नाम की प्रसूता को ओसियां से रेफर किया गया था। उन्हें कार्डियक समस्या होने के कारण सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ी थी। फिलहाल वह वेंटिलेटर पर हैं और चिकित्सकों के अनुसार स्थिति में सुधार होने के बाद उनका एमआरआई कराया जाएगा।

पाली के एक निजी अस्पताल से रेफर की गई रेखा को अत्यधिक रक्तस्राव और HELLP सिंड्रोम की शिकायत थी। शुक्रवार को उनकी स्थिति गंभीर होने पर कुछ समय के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया, हालांकि अब उन्हें वेंटिलेटर से हटाकर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।

शेरगढ़ से आई पूजा का भी अत्यधिक रक्तस्राव होने के बाद इलाज चल रहा है। उन्हें उम्मेद अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है।

नागौर के निजी अस्पताल से रेफर की गई रोशनी पहले से ही उच्च रक्तचाप की मरीज थीं। गर्भ में शिशु की स्थिति उल्टी होने और बीपी बढ़ने के कारण उनकी हालत बिगड़ गई। फिलहाल वह भी आईसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।

जैतारण के निजी अस्पताल से रेफर की गई एक अन्य प्रसूता बज्जू का उपचार भी जारी है। उनके श्वेत रक्त कण (WBC) चढ़ाए गए हैं और प्लेटलेट्स की कमी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन डोनर की व्यवस्था कर रहा है।

इस मामले में सबसे गंभीर लापरवाही धापू की बावड़ी निवासी एक महिला के साथ सामने आई, जिसकी सामान्य प्रसव के बाद एनीमिया के कारण उम्मेद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि 12 जुलाई को उन्हें O पॉजिटिव की जगह गलती से B पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया। तबीयत बिगड़ने पर अगले दिन उन्हें महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया। फिलहाल उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।

महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती दूसरी महिला तिंवरी निवासी समू हैं, जिन्हें 24 जून को गंभीर अवस्था में लाया गया था। उनके गर्भाशय और मूत्राशय (ब्लैडर) फट गए थे। वह पिछले 24 दिनों से वेंटिलेटर पर हैं और उनकी किडनी प्रभावित होने के कारण डायलिसिस किया जा रहा है।

तीसरी महिला बावड़ी निवासी उषा को अत्यधिक रक्तस्राव के बाद उम्मेद अस्पताल से महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार अधिक ब्लीडिंग के कारण उनकी किडनी पर असर पड़ा है और उनका इलाज जारी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। अतिरिक्त जिला कलक्टर (एडीएम) जवाहर चौधरी ने महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। वहीं एसडीएम (दक्षिण) पंकज जैन ने भी अस्पताल का दौरा कर इलाज और सुविधाओं की समीक्षा की। संभागीय आयुक्त के.एल. स्वामी ने उम्मेद अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली और चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

लगातार बढ़ रहे मामलों और सामने आ रही चिकित्सीय जटिलताओं के बीच अब अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और मरीजों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि सभी मरीजों का उपचार विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में किया जा रहा है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।