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कर्नल का संदेश—युवा पीढ़ी ही बनाएगी भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर

सीकर (राजस्थान)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के कटराथल परिसर में 29 मार्च 2026 को आयोजित दो दिवसीय वार्षिकोत्सव ‘प्रत्युषा-2026’ के अंतर्गत “आत्मनिर्भर शेखावाटी संगम: विकसित भारत में युवाओं की भूमिका” विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षाविदों, उद्योगपतियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लेकर आत्मनिर्भर शेखावाटी के विजन पर गहन विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं भारत एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क के प्रबंध संपादक उपेंद्र राय उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में भूतपूर्व सैनिक विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद लोहामरोर, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सह संयोजक ओम प्रकाश शर्मा, केंद्रीय निदेशक मंडल एसबीआई के निदेशक धर्मेंद्र सिंह शेखावत, मुंबई के उद्योगपति एवं समाजसेवी राजेंद्र गुप्ता, कर्नल देवेंद्र सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि उपेंद्र राय ने कहा कि आत्मनिर्भर शेखावाटी का सपना तभी साकार होगा, जब युवा अपने कौशल, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से क्षेत्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि अब समय केवल नौकरी खोजने का नहीं, बल्कि रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का है। कार्यक्रम के समापन वक्ता के रूप में कर्नल देव आनंद लोहामरोर ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मजबूती से जोड़ते हुए विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा कि यदि भारत 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय आत्मनिर्भर होता, तो हमारे सैनिकों को बर्फीले क्षेत्रों में आवश्यक उपकरण—जैसे विशेष जूते, टेंट और वस्त्र—की कमी के कारण अपने प्राण नहीं गंवाने पड़ते। इसी प्रकार 1999 के कारगिल युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उस समय भारत के पास स्वदेशी सैटेलाइट कम्युनिकेशन, लेजर गाइडेड वेपन और प्रिसीजन एम्युनिशन का अभाव था, जिसके कारण वैश्विक शक्तियों द्वारा भारत पर दबाव बनाया गया।

अमेरिका, चीन और रूस ने सैटेलाइट फुटेज देने से इनकार कर दिया था, जबकि इज़राइल ने भारत की सहायता करते हुए महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग प्रदान किया, जिससे युद्ध को शीघ्र समाप्त करने में मदद मिली। कर्नल लोहामरोर ने स्पष्ट किया कि यदि कोई राष्ट्र सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं है, तो वह वैश्विक स्तर पर दबाव और ब्लैकमेल का शिकार बन सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें। उन्होंने विशेष रूप से एआई-ड्रिवन एयर डिफेंस सिस्टम, एयरस्पेस मैनेजमेंट और दुश्मन की सटीक पहचान व टारगेटिंग जैसी आधुनिक सैन्य तकनीकों के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। कर्नल देव आनंद लोहामरोर के उद्बोधन के दौरान राष्ट्रभक्ति के संचार को उपस्थित सभी नागरिकों ने “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों के रूप में महसूस किया और पूरे सभागार में उत्साह का वातावरण बन गया। इसके साथ ही सभी ने आत्मनिर्भर भारत एवं आत्मनिर्भर शेखावाटी के निर्माण का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में आत्मनिर्भरता कोई नई अवधारणा नहीं है—पूर्व में हर गाँव, हर जिला अपने स्तर पर आत्मनिर्भर हुआ करता था। आज उसी भावना को आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी शिक्षा, उद्यमिता, सामाजिक सहभागिता और नेतृत्व के माध्यम से शेखावाटी को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राचार्य बनवारी लाल नेहरा को समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने पूर्व में दो युवकों को डूबने से बचाकर उनकी जान बचाई थी।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां—नृत्य, गायन, संभाषण, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताएं—भी आयोजित की गईं, जिन्होंने शेखावाटी की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। समारोह में परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजेंद्र सिंह, सहायक कुलसचिव परीक्षा डॉ. आरसी मीणा, सहायक कुलसचिव संपदा कैलाश लाल जांगिड़, आईटी निदेशक पंकज मील सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुभाष गुप्ता ने किया।

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