इसके साथ ही राज्य में आधुनिक और नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाकर 80 हजार बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
सचिवालय में आयोजित पेट्रोलियम और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सेक्टर की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोरा ने अधिकारियों को समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए:
सीएनजी स्टेशनों की स्थिति: राज्य में तय 60 नए सीएनजी पंपों के लक्ष्य में से 23 स्टेशन पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। शेष स्टेशनों का निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरा कर चालू करने का निर्देश दिया गया है।
घर-घर पहुंचेगी पीएनजी: बहुमंजिला इमारतों (Multistorey Buildings) और आवासीय परिसरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन तेजी से मुहैया कराने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोरा ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में रोजाना करीब 51 से 52 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 80 हजार बैरल प्रतिदिन किया जाएगा:
ASP और CSS तकनीक का प्रयोग: उत्पादन बढ़ाने के लिए बाड़मेर-सांचौर और जैसलमेर बेसिन में एएसपी (Alkali Surfactant Polymer - ASP) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं बीकानेर-नागौर बेसिन में सीएसएस (Cyclic Steam Stimulation - CSS) तकनीक से दोहन तेज किया जाएगा।
लोकल रिफाइनिंग पर जोर: राजस्थान में उत्पादित होने वाले 1.5 मिलियन टन कच्चे तेल का परिशोधन (Refine) राज्य की अपनी 9 MMTPA क्षमता वाली 'राजस्थान रिफाइनरी' में ही करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में पेट्रोलियम निदेशक अवधेश सिंह और RSGL के एमडी विनय पाटनी ने बताया कि राज्य में केयर्न वेदांता, ऑयल इंडिया, ओएनजीसी और फोकस एनर्जी जैसी प्रमुख कंपनियां काम कर रही हैं:
राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग: राजस्थान ऑनशोर प्राकृतिक गैस के उत्पादन में पूरे देश में दूसरे और कच्चे तेल के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है।
गैस उत्पादन के आंकड़े: वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन 2.6 से 2.8 MMSCM प्राकृतिक गैस का उत्पादन हो रहा है।
सक्रिय लाइसेंस: राज्य के पेट्रोलियम सेक्टर में इस समय 12 पेट्रोलियम लीज और 12 पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (PEL) एक्टिव हैं, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा।