वन विभाग द्वारा जारी दो अलग-अलग आदेशों में सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) कार्यालय में तत्काल प्रभाव से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें वे कर्मचारी भी शामिल हैं जो लंबे समय से जेडीए में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे, वहीं 10 जुलाई को जारी तबादला सूची के तहत जेडीए में लगाए गए कुछ अधिकारी भी इस कार्रवाई की जद में आ गए।
वापस बुलाए गए अधिकारियों में उप वन संरक्षक गुलजारी लाल, सहायक वन संरक्षक नीलोफर, निखिल शर्मा और मयंक महारिया शामिल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय वन अधिकारियों में विकास शर्मा, पृथ्वीराज मीणा, इंद्रेश यादव, राहुल शर्मा, जितेंद्र सिंह राठौड़, हर्ष कुमार शर्मा और रामकरण मीणा को भी मुख्यालय तलब किया गया है।
इसी तरह वनपाल महेंद्र टारिया, चेतराम और दयानंद यादव, सहायक वनपाल श्याम श्री शर्मा, राजाराम मीणा और कालूराम मौर्य तथा वनरक्षक होशियार सिंह और दिनेश कुमार शर्मा को भी प्रतिनियुक्ति से हटाकर मुख्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर जेडीए की उद्यान शाखा पर पड़ने की संभावना है। वर्तमान समय मानसून का है और इसी अवधि में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं। साथ ही शहर के पार्कों, हरित पट्टियों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाने वाले पौधों की देखरेख तथा वितरण का जिम्मा भी इसी शाखा के पास रहता है। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों की अचानक वापसी से कई योजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है।
मामले पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरिजीत बनर्जी ने कहा कि वन विभाग के कर्मचारी विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे, जिन्हें वापस बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी आवश्यकता से अधिक समय से अन्य विभागों में कार्य कर रहे थे। विभागीय जरूरतों को देखते हुए उन्हें मुख्यालय बुलाया गया है और भविष्य में आवश्यकता अनुसार दोबारा प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा सकता है।
वहीं जेडीए की अतिरिक्त आयुक्त प्रशासन प्रतिभा पारीक ने कहा कि इस संबंध में संबंधित शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उन्हें इस संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं है।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को सामान्य प्रक्रिया से अधिक विभागीय खींचतान के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब राज्य सरकार हरित राजस्थान और बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियानों को बढ़ावा दे रही है, जेडीए की उद्यान शाखा से एक साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों की वापसी कई सवाल खड़े कर रही है। अब नजर इस बात पर है कि दोनों विभागों के बीच समन्वय कैसे स्थापित होता है और मानसून के दौरान हरित विकास से जुड़े कार्यों को किस तरह प्रभावित होने से बचाया जाता है।