कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज संस्कृति का स्मरण किया:
दर्शन पाकर जताया सौभाग्य: मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गुप्त वृंदावन धाम में आने का अवसर मिला है। पहले यहां भगवान कृष्ण-बलराम के दर्शन का सौभाग्य मिलता था, और अब जल्द ही यहां श्री श्री राधा श्यामसुंदर के भी दर्शन प्राप्त होंगे।
सनातन परंपरा पर बल: उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा ब्रज क्षेत्र भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सदियों से देश को एकसूत्र में पिरोए हुए है।
'हरे कृष्ण मूवमेंट, जयपुर' की ओर से तैयार किया जा रहा यह केंद्र राजस्थान के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक होगा:
उद्घाटन की तिथि तय: धाम के अध्यक्ष अमितासना दास ने बताया कि लगभग 6 एकड़ जमीन में आकार ले रहे इस 17 मंजिला विशाल मंदिर का उद्घाटन अगले साल 12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा।
भावी पीढ़ियों को जोड़ने का प्रयास: इस दिव्य केंद्र का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति, वैदिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
गुप्त वृंदावन धाम अपनी अनूठी वास्तुकला और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम के लिए जाना जाएगा:
180 फीट लंबी कमान छतरी: मंदिर परिसर में 180 फीट लंबी और 108 फीट चौड़ी कमान छतरी का निर्माण किया जा रहा है।
AI और 3D तकनीक से कृष्ण लीलाएं: रात के समय इस छतरी पर अत्याधुनिक 'प्रोजेक्शन मैपिंग' (3D व AI तकनीक) के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण की पावन लीलाओं का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा।
108 मयूरों से सजा मुख्य द्वार: धाम का मुख्य प्रवेश द्वार 70 फीट ऊंचा होगा, जिसे पार पारंपरिक राजस्थानी शिल्पकला के तहत 108 मोर की सुंदर आकृतियों (मयूरों) से सुसज्जित किया जाएगा।