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रणथम्भौर से विदा हुआ चीता 'केपी-2': कूनो की टीम ने फलोदी रेंज में किया ट्रेंकुलाइज

सवाईमाधोपुर: मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से राजस्थान आए चीता केपी-2 (KP-2) को शुक्रवार सुबह सुरक्षित पकड़ लिया गया। कूनो से आई विशेषज्ञ टीम ने फलोदी रेंज के काला कुआं क्षेत्र में चीते को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे लेकर मध्यप्रदेश के लिए रवाना हो गई।

 

14 अप्रैल को हुई थी पहली एंट्री

रणथम्भौर टाइगर रिजर्व (फर्स्ट) के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि चीता केपी-2 को सबसे पहले 14 अप्रैल को पालीघाट रेंज के अजीतपुरा गांव में देखा गया था। तब से वह लगातार राजस्थान की सीमा में बना हुआ था। वन विभाग की टीमें उसकी पल-पल की मूवमेंट पर नजर रख रही थीं।

 

175 किलोमीटर का लंबा सफर और इन गांवों में मूवमेंट

अपने 25 दिनों के प्रवास के दौरान चीते ने रणथम्भौर और आसपास के इलाकों में करीब 175 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान उसने जंगल के पेरीफेरी (सीमावर्ती) क्षेत्रों और कई गांवों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई:

  • प्रमुख क्षेत्र: अजीतपुरा, लहसोड़ा, लक्ष्मीपुरा, भैरूपुरा, जैतपुर, हलौंदा, कुशालीपुरा और रणथम्भौर के जोन नंबर 7, 8 व 9 में उसका मूवमेंट रहा।

  • अन्य ठिकाने: इसके अलावा वह श्याम वाटिका, संग्रामपुरा, नीमली, सीतामाता, कालीभाट, हिंदवाड़, दूमोदा, कैलाशपुरी और मौजीपुरा जैसे क्षेत्रों में भी देखा गया।

 

कूनो की टीम ने सुबह 9:30 बजे किया प्रस्थान

पिछले दो दिनों से चीता जंगल के भीतर ही घूम रहा था, जिससे उसे ट्रेंकुलाइज करना आसान हो गया। शुक्रवार सुबह जैसे ही वह काला कुआं क्षेत्र में लोकेट हुआ, कूनो से आई टीम ने उसे सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया। हेल्थ चेकअप में वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, जिसके बाद सुबह करीब 9:30 बजे उसे विशेष वाहन से वापस कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया।

 

ग्रामीणों और प्रशासन ने ली राहत की सांस

चीते की मौजूदगी के कारण पिछले कई दिनों से रणथम्भौर के आसपास के गांवों में दहशत का माहौल था। हालांकि, चीते ने किसी पर हमला नहीं किया, लेकिन उसके लगातार आबादी क्षेत्र के पास घूमने से वन विभाग अलर्ट पर था। अब चीते की सुरक्षित वापसी के बाद प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

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