राजलदेसर : राजलदेसर के राजकीय अस्पताल में उपचार के दौरान एक युवक की हालत बिगड़ने और बीकानेर ले जाते समय मौत हो जाने का मामला गरमा गया है। परिजनों ने ड्यूटी डॉक्टर पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर महापड़ाव डाल दिया है। सूचना मिलते ही राजलदेसर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हुआ।
घटना को लेकर स्थानीय निवासियों ने जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा को एक शिकायत पत्र भी सौंपा है, जिसमें डॉक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं:
चोट के बाद किया था भर्ती: राजलदेसर के वार्ड संख्या 26 निवासी रामूराम जाट (कुछ संदर्भों में रामलाल भाट अंकित) को पैर में गंभीर चोट लगने के बाद सोमवार सुबह करीब 9 बजे अस्पताल लाया गया था।
गंभीरता को किया नजरअंदाज: परिजनों का आरोप है कि वहां कार्यरत डॉ. कपिल धाभाई ने मरीज की आंतरिक चोटों और बिगड़ती हालत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने बिना किसी गहन जांच के आनन-फानन में पैर पर पक्का प्लास्टर (कास्ट) चढ़ा दिया।
मिन्नतें करते रहे परिजन: भर्ती रहने के दौरान मरीज की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उसे खून की उल्टियां होने लगीं। घबराए परिजनों ने डॉक्टर से बार-बार गुहार लगाई कि मरीज को किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाए, लेकिन डॉक्टर लगातार उन्हें सब ठीक होने का आश्वासन देते रहे।
परिजनों ने बताया कि जब सोमवार दोपहर करीब 2 बजे मरीज की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तब जाकर डॉक्टर ने उसे बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल के लिए रेफर किया।
अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित: परिजन मरीज को लेकर शाम करीब 5 बजे बीकानेर पहुंचे, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि मरीज ने रास्ते में या अस्पताल पहुंचने से ठीक पहले ही दम तोड़ दिया था।
बीकानेर से मृत घोषित होने के बाद आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव को एंबुलेंस से वापस राजलदेसर लेकर आए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शव को डीप-फ्रीजर में रखकर वहीं धरना शुरू कर दिया। आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने दो टूक मांगें रखी हैं:
निलंबन की मांग: कथित लापरवाही बरतने वाले आरोपी डॉ. कपिल धाभाई को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया जाए।
आर्थिक सहायता: मृतक के आश्रितों को 50 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजलदेसर थानाधिकारी और पुलिस जाब्ता मौके पर डटा हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शव का पोस्टमार्टम कराने और धरना समाप्त करने के लिए समझाइश की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण और पीड़ित परिवार अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जिला कलेक्टर या चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारी मौके पर आकर लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।