कथा के दूसरे दिन पंडाल में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने भक्ति और मन की शुद्धता पर जोर दिया।
सूक्ति: उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य का मन ही साफ नहीं है, तो वह शिव या किसी भी रूप में भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता।
उपदेश: उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी आडंबरों से ज्यादा जरूरी आंतरिक शुद्धि है, क्योंकि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' की कहावत ईश्वर भक्ति का मूल आधार है।
कथा के दौरान जयपुर की हवामहल विधानसभा सीट से विधायक बालमुकुंदाचार्य भी मेडिसिटी स्थित कथा स्थल पहुंचे।
सम्मान: विधायक ने मंच पर जाकर पंडित प्रदीप मिश्रा का माल्यार्पण किया और उन्हें एक स्मृति चिह्न (तस्वीर) भेंट कर आशीर्वाद लिया।
साधना: आशीर्वाद लेने के बाद बालमुकुंदाचार्य ने आम श्रद्धालुओं और संतों के बीच बैठकर पूरी तन्मयता से शिव कथा का श्रवण किया।
विधायक बालमुकुंदाचार्य ने मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्म और सुरक्षा पर अपने विचार रखे।
आतंक पर प्रहार: उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में विधर्मियों द्वारा फैलाए गए आतंक से मानवता त्रस्त है।
सनातन की शक्ति: उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दौर में केवल व्यास पीठ, धर्माचार्य और हमारी मातृ शक्ति ही धर्म की रक्षा कर सकती है। लाखों की संख्या में उमड़ने वाली यह मातृ शक्ति सनातन आयोजनों के जरिए धर्म के अस्तित्व को सुरक्षित रख रही है।
भीलवाड़ा के मेडिसिटी ग्राउंड में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है।
भीड़ का प्रबंधन: भीषण गर्मी के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। प्रशासन और आयोजन समिति ने पेयजल और छाया की विशेष व्यवस्था की है।
विशाल पंडाल: उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के कारण पंडाल छोटा पड़ता दिखाई दे रहा है, जिसके चलते लोग बाहर भी बैठकर कथा सुन रहे हैं।