धौलपुर: धौलपुर नगर परिषद एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है। इस बार कार्यवाहक आयुक्त और वर्तमान एक्सईएन (XEN) गुमान सिंह सैनी का एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसने शहर की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस वायरल वीडियो में सैनी कथित तौर पर ₹40,000 की रिश्वत लेते और नोटों को गिनते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में रिश्वत देने वाला व्यक्ति एक ठेकेदार का सुपरवाइजर हेमंत बताया जा रहा है, जो उनसे '2 प्रतिशत के बजाय ढाई प्रतिशत कमीशन' देने की बात करता नजर आ रहा है।
वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कार्यवाहक आयुक्त गुमान सिंह सैनी ने सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है और आरोपों को खारिज किया है:
दबाव बनाने का आरोप: गुमान सिंह सैनी का कहना है कि चूरू का एक ठेकेदार उन पर लंबे समय से फर्जी बिलों को पास करने का अनुचित दबाव बना रहा था।
एसपी से शिकायत: सैनी के अनुसार, जब उन्होंने फर्जी बिल पास करने से इनकार कर दिया, तो ठेकेदार ने इस वीडियो को दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल करने और दबाव बनाने का प्रयास किया। उन्होंने इस पूरी साजिश के खिलाफ जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित में शिकायत दर्ज करवाकर जांच की मांग की है।
धौलपुर नगर परिषद में रिश्वतखोरी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 11 सितंबर 2025 को भी यहां भ्रष्टाचार का एक बहुत बड़ा भंडाफोड़ हुआ था:
एसीबी की बड़ी रेड: भरतपुर एसीबी (ACB) के एएसपी अमित सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने नगर परिषद कार्यालय में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान टीम ने 3.10 लाख रुपए की भारी रिश्वत लेते हुए 5 अधिकारियों और कर्मचारियों को रंगे हाथों ट्रैप (गिरफ्तार) किया था।
ये हुए थे गिरफ्तार: एसीबी की उस कार्रवाई में एईएन (AEN) प्रिया झा, कैशियर भरत, ड्राइवर देवेंद्र, यूडीसी (UDC) नीरज और एक संविदाकर्मी हरेंद्र को दबोचा गया था। इस मामले में तत्कालीन नगर परिषद कमिश्नर अशोक शर्मा को सीधे ट्रैप नहीं किया गया था, लेकिन जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर सरकार ने उन्हें तुरंत सस्पेंड (निलंबित) कर दिया था।
भ्रष्टाचार के इन मामलों के बीच धौलपुर शहर की बुनियादी स्थिति बद से बदतर होती जा रही है, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है:
नारकीय बना जीवन: धौलपुर शहर में गंदगी के ढेर और सीवरेज के गंदे पानी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। सड़कों पर बहते गंदे पानी के कारण स्थानीय नागरिकों का जीवन पूरी तरह नारकीय बन चुका है। इसके खिलाफ शहर में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: स्थानीय नागरिक और सोशल मीडिया क्रिएटर्स शहर की इस दुर्दशा को उजागर करने के लिए लगातार वीडियो बनाकर प्रशासन को जगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नगर परिषद की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। आम जनता का आरोप है कि जनता की समस्याओं को दरकिनार कर नगर परिषद आयुक्त द्वारा केवल अपने चहेते ठेकेदारों को ही प्राथमिकता से भुगतान (पेमेंट) जारी किया जा रहा है।