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Rajasthan Politics: E-20 पर सियासत तेज, खाचरियावास ने इथेनॉल और चीनी की कीमतों को लेकर BJP पर साधा निशाना

जयपुर। ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लागू की गई E-20 नीति को लेकर देशभर में बहस जारी है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण से वाहनों की क्षमता, माइलेज और इंजन पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच राजस्थान में E-20 और इथेनॉल नीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने इथेनॉल सेक्टर और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

खाचरियावास ने दावा किया कि इथेनॉल सेक्टर में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के कारण आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर चीनी की कीमतों में करीब 25 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का फायदा आम उपभोक्ता को मिलने के बजाय कुछ बड़े कारोबारी और संबंधित सेक्टर से जुड़े लोग उठा रहे हैं।

'खा गई चीनी, पी गई तेल, देखो यह है बीजेपी का खेल'

भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए खाचरियावास ने कहा, 'खा गई चीनी, पी गई तेल, देखो यह है बीजेपी का खेल।' उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ महंगाई से आम जनता परेशान है, वहीं सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाने में लगी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि चीनी जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु के दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है।

खाचरियावास ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी सवाल उठाए और इथेनॉल नीति में उनकी भूमिका पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इथेनॉल के कारोबार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और भाजपा के कई नेता इससे लाभ उठा रहे हैं। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक दावे हैं और इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने की पुष्टि नहीं की गई है।

इथेनॉल को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला

कांग्रेस नेता ने कहा कि इथेनॉल के मुद्दे पर पूरी भाजपा को जवाब देना चाहिए। उनका आरोप है कि इथेनॉल की बढ़ती मांग और सरकार की नीतियों का असर चीनी उद्योग पर पड़ा है और इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को महंगी चीनी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इथेनॉल मिश्रण नीति से किसानों, चीनी मिलों, वाहन मालिकों और आम उपभोक्ताओं को वास्तविक फायदा कितना मिला है। साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि नीति से जुड़े आर्थिक लाभ का वितरण किस तरह हो रहा है।

'चीनी का मुद्दा बनेगा BJP के पतन का कारण'

खाचरियावास ने चीनी की कीमतों को लेकर भाजपा सरकार पर राजनीतिक हमला और तेज करते हुए कहा कि जब भी चीनी के दाम बहुत ज्यादा बढ़े हैं, तब सरकारों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि चीनी की महंगाई भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के पतन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में महंगी चीनी का मुद्दा सरकार के खिलाफ जनता के असंतोष को बढ़ा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से महंगाई पर तत्काल नियंत्रण करने की मांग की।

सरकार का दावा- इथेनॉल से चीनी की तेजी का सीधा संबंध नहीं

वहीं, चीनी की कीमतों में तेजी को लेकर सरकार का पक्ष कांग्रेस के आरोपों से अलग है। सरकार की ओर से कहा गया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को सीधे तौर पर इथेनॉल नीति से जोड़ना सही नहीं है। बाजार में चीनी की कीमतें कई कारकों से प्रभावित होती हैं, जिनमें उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक, मांग, निर्यात नीति और मौसम जैसे मुद्दे शामिल हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल की बढ़ती मांग का असर केवल गन्ने तक सीमित नहीं है। इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का जैसे फीडस्टॉक की मांग बढ़ने से दूसरी कृषि उपज और उनसे जुड़े खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में E-20 नीति को लेकर बहस केवल वाहन के माइलेज तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका संबंध किसानों, चीनी उद्योग, खाद्य महंगाई और ऊर्जा नीति से भी जुड़ गया है।

E-20 पर बढ़ती राजनीतिक बहस

E-20 नीति का उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाकर पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि, इसके साथ वाहनों की ईंधन दक्षता, पुराने वाहनों पर संभावित प्रभाव और खाद्य फसलों के उपयोग जैसे मुद्दों पर बहस जारी है।

राजस्थान में खाचरियावास के बयान के बाद E-20 नीति अब राजनीतिक मुद्दा भी बनती दिखाई दे रही है। कांग्रेस जहां इथेनॉल और चीनी की कीमतों को जोड़कर सरकार पर निशाना साध रही है, वहीं सरकार का तर्क है कि चीनी की कीमतों में तेजी के लिए केवल इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में आने वाले दिनों में चीनी के दाम, इथेनॉल नीति और E-20 को लेकर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।