जयपुर: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET)-UG 2026 री-एग्जाम में रविवार को जयपुर के बिंदायका स्थित परीक्षा केंद्र पर मोबाइल से चीटिंग करने की कोशिश करने वाली छात्रा हिमांशी तिवाड़ी को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी छात्रा को न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) में जेल भेजने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी छात्रा पुलिस के घेरे में अपना चेहरा छुपाते हुए बाहर निकली।
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और जांच में इस हाईटेक नकल को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
एआई (AI) की मदद से चीटिंग: 22 वर्षीय आरोपी छात्रा हिमांशी तिवाड़ी (निवासी—प्रेम नगर, गुर्जर की थड़ी) ने पुलिस को बताया कि वह परीक्षा के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सवालों के सही जवाब खोजने के लिए परीक्षा केंद्र के भीतर मोबाइल लेकर आई थी।
पेपर की तस्वीरें बरामद: परीक्षा समाप्त होने से करीब 15 मिनट पहले जब एग्जाम हॉल में मौजूद वीक्षक (टीचर) को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, तो उन्होंने उसे पकड़ लिया। जांच करने पर उसके पास से मोबाइल बरामद हुआ, जिसमें नीट के प्रश्नपत्र की तस्वीरें खींची हुई मिलीं।
जैमर ने नाकाम की साजिश: राहत की बात यह रही कि परीक्षा केंद्र के आसपास प्रशासन द्वारा लगाए गए जैमर पूरी तरह सक्रिय थे। जैमर के कारण मोबाइल का नेटवर्क ब्लॉक था, जिससे वह प्रश्नपत्र की तस्वीरें और अन्य गोपनीय जानकारियां परीक्षा केंद्र से बाहर किसी अन्य व्यक्ति को नहीं भेज सकी।
सुरक्षा जांच को लेकर जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा था, उसकी परतें भी प्रारंभिक जांच में खुल गई हैं:
दो बार बजा था अलर्ट: परीक्षा केंद्र में प्रवेश के दौरान जब छात्रा की चेकिंग की जा रही थी, तब मेटल डिटेक्टर से दो बार अलर्ट (बीप की आवाज) मिला था।
सुरक्षाकर्मियों को दिया चकमा: जब सुरक्षाकर्मियों ने अलर्ट को लेकर पूछताछ की, तो शातिर छात्रा ने उन्हें गुमराह करते हुए कहा कि यह अलर्ट उसके अंडरगारमेंट्स में लगे हुक के कारण आ रहा है। सुरक्षाकर्मी उसकी बातों में आ गए और उसे अंदर जाने की अनुमति दे दी। छात्रा ने मोबाइल को अंडरगारमेंट्स में शर्ट के बटन के नीचे छुपाकर रखा था।
इस गंभीर लापरवाही और नकल के प्रयास को देखते हुए जांच एजेंसियां बेहद बारीकी से हर पहलू को खंगाल रही हैं:
स्टाफ पर भी शिकंजा: सुरक्षा जांच में हुई इस बड़ी चूक को देखते हुए पुलिस ने देर रात तक परीक्षा केंद्र के अधीक्षक (सेंटर सुपरिंटेंडेंट) और परीक्षा ड्यूटी में तैनात अन्य कर्मचारियों को रोककर कड़ी पूछताछ की है। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या सुरक्षा जांच में केवल लापरवाही हुई या फिर इसके पीछे कोई मिलीभगत थी।
फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा फोन: जब्त किए गए मोबाइल को पुलिस ने फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ एआई से जवाब ढूंढने के लिए हो रहा था या फिर प्रश्नपत्र को बाहर किसी सॉल्वर गैंग तक पहुंचाने की कोशिश की गई थी।
केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए बनाए गए कड़े कानून के तहत इस मामले में सख्त कार्रवाई की जा रही है। यदि जांच में परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के इस्तेमाल और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि पूरी तरह कोर्ट में साबित हो जाती है, तो नए कड़े कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल तक के कारावास (जेल) और 10 लाख रुपए तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है।