स्कूल के छात्रों ने नारेबाजी करते हुए गेट पर प्रदर्शन किया और अपनी समस्याएं रखीं:
गंभीर समस्याएं: छात्रों का आरोप है कि स्कूल में लंबे समय से शौचालय बेहद खराब हालत में हैं और इस्तेमाल करने लायक नहीं बचे हैं। क्लासरूम की दीवारों और छतों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है।
अनसुनी हुई शिकायतें: पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। विद्यार्थियों का कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार प्रिंसिपल और स्कूल प्रशासन को शिकायत दी गई, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा।
मामले की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मूक-बधिर स्कूल पहुंचे और छात्रों व व्यवस्थाओं का जायजा लिया:
सीएम को लिखेंगे पत्र: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वे खुद इस पूरी बदहाली को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखेंगे।
अयोग्य शिक्षकों का आरोप: गहलोत ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल में ऐसे शिक्षकों को नियुक्त कर दिया गया है जिन्हें खुद 'साइन लैंग्वेज' (सांकेतिक भाषा) तक नहीं आती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है।
हंगामे और जनप्रतिनिधियों के निरीक्षण के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग की टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिली भारी खामियों और बदहाली को देखते हुए विभाग ने त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई की:
प्रिंसिपल पर गाज: स्कूल की प्रिंसिपल को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है।
स्टाफ पर कार्रवाई: इसके अलावा एक शिक्षक (Teacher) और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (Fourth Grade Employee) को तुरंत प्रभाव से एपीओ (APO - पदस्थापन प्रतीक्षा) कर दिया गया है।