राजगढ़: राजगढ़ कस्बे के औद्योगिक क्षेत्र स्थित 'शेखा की बगीची' के पास रहने वाले रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के इंस्पेक्टर विश्राम मीणा के घर में शनिवार तड़के एक लेपर्ड घुस गया। लेपर्ड ने घर के बगीचे में बंधे पालतू कुत्ते पर जानलेवा हमला कर दिया और करीब 16 मिनट तक घर के भीतर ही तांडव मचाता रहा। यह पूरी रूहकंपा देने वाली घटना घर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई है।
आरपीएफ इंस्पेक्टर विश्राम मीणा ने बताया कि रोज की तरह उनका पालतू कुत्ता घर के बगीचे में पेड़ों के बीच लोहे की चेन और बेल्ट से बंधा हुआ था।
दिल दहलाने वाला नजारा: शनिवार सुबह जब परिवार के लोग सोकर उठे और बगीचे की तरफ गए, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। लोहे की चेन में केवल उनके पालतू कुत्ते का कटा हुआ सिर फंसा था, जबकि शरीर का बाकी हिस्सा गायब था।
CCVT फुटेज से खुला राज: घबराए परिजनों ने जब तुरंत घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, तो उसमें एक बड़ा लेपर्ड घर की ऊंची बाउंड्रीवाल को आसानी से कूदकर अंदर दाखिल होता दिखाई दिया।
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, बाउंड्रीवाल कूदने के बाद लेपर्ड सीधे पेड़ों के पास गया और वहां असहाय बंधे कुत्ते पर झपट्टा मार दिया।
बेबस रहा पालतू श्वान: कुत्ता चेन से बंधे होने के कारण खुद का बचाव नहीं कर सका। लेपर्ड ने करीब 16 मिनट तक वहीं रुककर कुत्ते को बुरी तरह नोंचा और उसे मौत के घाट उतार दिया।
सिर छोड़कर ले गया धड़: चूंकि कुत्ता गले में लोहे की चेन से मजबूती से बंधा था, इसलिए लेपर्ड उसे पूरा खींच नहीं सका। अंत में वह कुत्ते के सिर को चेन में ही छोड़कर, धड़ वाले बाकी हिस्से को जबरन खींचकर बाउंड्रीवाल फांदते हुए वापस घने जंगल की तरफ भाग गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि राजगढ़ का यह इलाका चारों तरफ से अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसके कारण आए दिन पैंथर और लेपर्ड जैसे हिंसक वन्यजीव आबादी क्षेत्र में शिकार की तलाश में आ जाते हैं।
पहले भी कर चुका है हमला: पीड़ित परिवार ने बताया कि करीब एक साल पहले भी इसी लेपर्ड ने उनके घर में बंधी भैंस के पाड़े (बच्चे) पर हमला कर दिया था। हालांकि, उस समय परिवार के लोगों की आंख खुल गई और उनके शोर मचाने के कारण लेपर्ड शिकार छोड़कर भाग गया था।
इस खौफनाक वारदात के बाद से पूरी कॉलोनी के लोग दहशत में हैं और रात के समय घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वनकर्मियों ने घटना स्थल और आसपास के कच्चे रास्तों से लेपर्ड के पगमार्क (पदचिह्न) उठाए हैं और उसकी मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि वन्यजीवों को आबादी में आने से रोकने के लिए पहाड़ी सीमा पर मजबूत तारबंदी (Fencing) करवाई जाए।