नई दिल्ली: नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को उनकी अंतरिम मेडिकल जमानत (Interim Medical Bail) याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करने के बजाय पेंडिंग (लंबित) रखा है।
जस्टिस एमएस सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने एम्स (AIIMS) द्वारा पेश की गई विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट की जांच के बाद अपना फैसला सुनाया:
मेडिकल रिपोर्ट का हवाला: कोर्ट ने कहा कि एम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती रखने या अंतरिम जमानत देने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती।
केयरगिवर की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को राहत देते हुए 24 घंटे अपनी पसंद का एक ट्रेंड केयरगिवर (देखभाल करने वाला व्यक्ति) साथ रखने की अनुमति दी है।
तबीयत बिगड़ने पर विकल्प: अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में स्वास्थ्य बिगड़ता है, तो वे दोबारा अंतरिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़ा एक तथ्य सामने आने पर शीर्ष अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई:
तथ्य छुपाने पर नाराजगी: बेंच ने इस बात पर सख्त नाराजगी जाहिर की कि याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल की जानकारी को छुपाया गया था।
सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील और सरकारी पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं:
याचिकाकर्ता की दलील: आसाराम के सीनियर वकील डी.एस. नायडू ने कोर्ट में तर्क दिया कि आसाराम की उम्र 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है और वे कई गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसके लिए उन्हें निरंतर देखभाल की आवश्यकता है।
जेल प्रशासन को निर्देश: मामले को सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि आसाराम को जेल के भीतर ही सभी आवश्यक और उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।