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रणथंभौर में हाई अलर्ट: दो युवा बाघिनें 'माही' और 'RBT-2510' अचानक लापता, तलाश में जुटीं 5 टीमें

सवाई माधोपुर: रणथंभौर नेशनल पार्क के घने जंगलों में दो बाघिनों का मूवमेंट पूरी तरह ठप होने के बाद वन विभाग ने एक बड़ा और सघन सर्च ऑपरेशन (Sexton Search Operation) शुरू किया है। दोनों बाघिनों की टोह लेने के लिए वन्यजीव अधिकारी और ट्रैकर रात-दिन एक कर रहे हैं।

 

मां 'रिद्धि' से टेरिटोरियल फाइट के बाद से लापता है 'माही'

डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (DFO) मानस सिंह ने बताया कि लापता हुई पहली बाघिन आरबीटी-2504 (माही) विख्यात बाघिन टी-124 (रिद्धि) की बेटी है।

  • वर्चस्व की जंग: माही अब युवा हो चुकी है और जंगल में अपनी अलग टेरिटरी (इलाका) बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी। इस चक्कर में उसकी अपनी मां रिद्धि के साथ कई बार हिंसक भिड़ंत (टेरिटोरियल फाइट) हो चुकी थी।

  • 17 दिन से कोई सुराग नहीं: बीती 3 मई को भी मां-बेटी के बीच इलाके को लेकर भयंकर लड़ाई हुई थी। माही को आखिरी बार वनकर्मियों ने 2 मई को देखा था, लेकिन उस फाइट के बाद से (पिछले करीब 17 दिनों से) वह रणथंभौर के जोन नंबर 2, 3 और 4 के लेक एरिया से पूरी तरह गायब है।

 

मां बनने वाली थी 'RBT-2510', 28 दिनों से मूवमेंट ट्रेस नहीं

चिंता का दूसरा बड़ा कारण टी-107 (सुल्ताना) की बेटी बाघिन आरबीटी-2510 का लापता होना है। यह बाघिन पार्क के झूमर बावड़ी, फतेह कैफे, आमा घाटी और फलोदी रेंज में राज करती थी।

  • शावकों को जन्म देने की थी उम्मीद: इस बाघिन को अक्सर नर बाघ-2407 के साथ देखा जाता था। करीब 28 दिन पहले झूमर बावड़ी क्षेत्र में दोनों को आखिरी बार साथ देखा गया था। परिस्थितियों को देखते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों का अनुमान था कि आरबीटी-2510 गर्भवती है और जल्द ही मां बन सकती है।

  • गुफाओं में छिपे होने की आशंका: करीब चार सप्ताह से इसका कोई भी विजुअल या फुटप्रिंट सामने नहीं आया है। कयास यह भी हैं कि वह शावकों को जन्म देने के लिए किसी सुरक्षित गुफा या कंदरा में ओझल हो गई हो।

 

जंगल में पैदल पेट्रोलिंग, 100 नए कैमरे इंस्टॉल

दो-दो बाघिनों के लंबे समय तक नजर न आने को वन विभाग बेहद गंभीरता से ले रहा है। शिकार या किसी अनहोनी की आशंका को खारिज करने के लिए ग्राउंड लेवल पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है:

  • पैदल सर्चिंग: डीएफओ मानस सिंह के मुताबिक, वन्यजीव कर्मियों और अनुभवी ट्रैकर्स की 5 विशेष टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें जान जोखिम में डालकर घने जंगलों और दुर्गम नालों में पैदल पेट्रोलिंग (जंगल गश्त) कर रही हैं।

  • डिजिटल नजर: जिन संभावित इलाकों में दोनों बाघिनों का पूर्व में मूवमेंट रहा है, वहां वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से 100 अतिरिक्त कैमरा ट्रैप बढ़ा दिए हैं ताकि रात के समय भी उनकी तस्वीरें कैद की जा सकें।

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