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राजस्थान में आज भी गैस सिलेंडरों की सप्लाई को लेकर हालात नहीं सुधरे "गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें देखी गईं "

राजस्थान में आज भी गैस सिलेंडरों की सप्लाई को लेकर हालात नहीं सुधरे हैं, और प्रदेश के अधिकतर जिलों में गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें देखी गईं हैं। ग्राहकों को ऑनलाइन बुकिंग में भी परेशानी हो रही है।

हालांकि, गैस एजेंसी मालिकों का कहना है कि गैस की कोई कमी नहीं है, बल्कि ग्राहकों में दहशत के कारण अचानक मांग बढ़ गई है।

गैस की किल्लत के चलते होटल और रेस्टोरेंट में कोयले, लकड़ी और इलेक्ट्रिक चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे इन उत्पादों की कमी और कीमतों में वृद्धि का भी दावा किया जा रहा है। अलवर में कमर्शियल सिलेंडर की अनुपलब्धता से दुकानदार, ढाबे और होटल मालिक विशेष रूप से परेशान हैं, जिसके चलते ढाबों पर खाना और चाय-कॉफी की दुकानों पर भाव बढ़ गए हैं।

भरतपुर, कोटा, अजमेर, सलूंबर सहित कई जिलों में घरेलू गैस एजेंसियों के बाहर आज भी लाइनें लगी रहीं, और उपभोक्ताओं ने सिलेंडर न मिलने और बुकिंग की सही जानकारी न मिलने की शिकायत की। वहीं, अजमेर में एक गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगने को लेकर ग्राहकों के बीच मारपीट भी हुई।

हनुमानगढ़ के रावतसर उपखंड में गैस सिलेंडर की कमी की शिकायतों के समाधान के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसमें सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है।

जयपुर में एक रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि उन्होंने ₹8000 की नई भट्टी बनवाई है, जिसमें कोयले से काम चलाया जा रहा है, और कोयला फिलहाल ₹26 प्रति किलो मिल रहा है। गैस की किल्लत बनी रहने पर कोयले की मांग और कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे छोटे कारोबारियों के लिए स्थिति और मुश्किल हो जाएगी।