जैसलमेर: राजस्थान के राज्य पक्षी और दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शुमार गोडावण (GIB) के संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। जैसलमेर में संचालित ब्रीडिंग सेंटर पर तीन नए गोडावण के चूजों का जन्म हुआ है, जिसके बाद अब देश में गोडावण की कुल संख्या बढ़कर 94 हो गई है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस बड़ी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए वन विभाग और वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी है।
जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर पर वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत रंग लाई है:
कृत्रिम गर्भाधान की सफलता: वन्यजीव विंग के मुताबिक, जन्म लेने वाले तीन चूजों में से दो का जन्म कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रखे गए अंडों से हुआ है। चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में गोडावण संरक्षण को लेकर यह एक बड़ा मील का पत्थर है।
जंगल से लाया गया अंडा: वहीं, तीसरे चूजे का जन्म जंगल (नेचुरल हैबिटेट) से सुरक्षित उठाकर लाए गए एक अंडे को इनक्यूबेटर में सहेजने के बाद हुआ है। अभी ब्रीडिंग सीजन जारी है, जिससे आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) के डीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने इस पूरी संरक्षण प्रक्रिया और इसके वैज्ञानिक फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी:
दो केंद्रों पर चल रहा काम: जैसलमेर जिले में वन विभाग और जीआईबी प्रोजेक्ट के तहत 'सम' के सुदासरी और रामदेवरा में दो अत्याधुनिक ब्रीडिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। यहां विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे वैज्ञानिक तरीके से चूजों की निगरानी और पालन-पोषण करती है।
नेचुरल अंडों के संरक्षण के फायदे: डीएफओ ने बताया कि जंगल से अंडों को सुरक्षित केंद्र पर लाने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इससे गोडावण की आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) मजबूत होती है। इससे नई पीढ़ी के पक्षी अधिक स्वस्थ और बदलते पर्यावरण के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम बनते हैं। साथ ही, इन अंडों को खुले जंगल में घूम रहे शिकारियों और जंगली जानवरों के खतरे से भी बचाया जा सकता है।
साल 2018 से चलाए जा रहे इस विशेष प्रजनन कार्यक्रम के साथ-साथ सरकार अब इन पक्षियों के जमीनी बुनियादी ढांचे और सुरक्षा को लेकर भी करोड़ों रुपए खर्च कर रही है:
हाईवे और तारों से सुरक्षा: गोडावण अक्सर उड़ते समय बिजली के तारों या सड़क हादसों का शिकार हो जाते हैं। इसी समस्या के स्थाई समाधान के लिए रामदेवरा क्षेत्र में 6.25 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से एक 64 मीटर लंबी विशेष सुरंग (अंडरपास) का निर्माण किया जा रहा है।
सुरक्षित कॉरिडोर: यह सुरंग गोडावण और अन्य वन्यजीवों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या दुर्घटना के खतरे के, हाईवे के एक तरफ से दूसरी तरफ सुरक्षित आने-जाने के लिए एक ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा प्रदान करेगी।