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लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना अफसोसजनक, क्योंकि स्पीकर किसी एक दल के नहीं है, वे सभी के हैं।

उन्होंने कहा कि स्पीकर को नियमों के उल्लघंन पर रोकने और टोकने का अधिकार है। ये सदन मेला नहीं है, जो नियम से नहीं चलेंगे,उनका माइक बंद होगा।

शाह ने कहा, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, अरे भाई यहां नियमों से बोलना पड़ता है, यहां इतने वरिष्ठ सदस्य बैठे हैं, मुझे तो अभी भी नहीं मालूम पड़ता कि शशि थरूर, बालू साहब बैठे हैं, क्यों नहीं सिखाते उन्हें। इतना सीखा दें तो समस्या का वहीं समाधान हो जाए। वे कहते हैं, हमें बोलने नहीं देते हैं।

ये PM मोदी से आकर गले लग जाते हैं। आंख मारते हैं। फ्लाइंग किस देते हैं। मुझे तो बोलने में भी शर्म आती है। किसी के भी सामने हम एक अंगुली दिखाते हैं तो 4 अंगुलियां अपनी तरफ भी दिखती है। किस तरह से ये आचरण की बात करते हैं जब कांग्रेस के सर्वोच्च नेता ही फ्लाइंग किस देते हैं। प्रधानमंत्री से आकर गले लिपट जाते हैं। मेरा कोई शब्द संसद प्रणाली के अनुकूल नहीं है तो इसे हटा सकते हैं।

शाह ने गिनाया, कांग्रेस- राहुल को सदन में कितना समय मिला

  • कितना बोलना है इसके लिए कुछ नियम बने हैं। 17वीं लोकसभा कांग्रेस को 157 घंटे 55 मिनट का समय दिया गया। जबकि उनके 52 सदस्य थे। कांग्रेस को भाजपा से 6 गुना ज्यादा समय दिया गया। जबकि भाजपा के पास 6 गुना ज्यादा सदस्य थे
  • 18वीं लोकसभा में भी कांग्रेस को भाजपा से दो गुना समय मिला। नेता प्रतिपक्ष कहते हैं कि हमें बोलने नहीं दिया जाता। मगर बोलने का मौका आता है तो जर्मनी में होते हैं इंग्लैंड में होते हैं। फिर शिकायत करते हैं।
  • 18वीं लोकसभा में 157 घंटे 55 मिनट कांग्रस के सदस्य बोले। मैं विपक्ष नेता से पूछना चाहता हूं कि आप तब क्यों नहीं बोले। किसने रोका था। वो तो आपका अधिकार है कि आपकी पार्टी से कौन बोलेगा।
  • विपक्ष के नेता स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर भी कुछ नहीं बोलते। फिर प्रस्ताव लाते क्यों है। एक तो बोलना नहीं चाहते हैं। बोलना चाहते हैं कि नियम अनुसार नहीं बोलना चाहते हैं।
  • स्पीकर के द्वारा एक बार टोकने पर दूसरी बार वही बात करोगे तो स्पीकर के पास क्या विकल्प रहता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आप मैगजीन पर नहीं बोल सकते, फिर भी आप उसी विषय पर बोलेंगे तो टोकना पड़ेगा।
  • SIR पर चर्चा थी। विपक्ष के नेता को बोला गया कि आप बोलिए। उन्होंने सदन डिस्टर्ब किया। उनको अचनाक एक आइडिया आया कि मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा हो। आपके परनाना से लेकर आपकी दादी से पिता जी तक, बड़े बड़े नेता के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हुई।
  • मैं सिर्फ इस सदन की बात नहीं करता। 17वीं लोकसभा में विपक्ष को 40% समय दिया गया। मेंशन ऑफ थैंक्स में 34% समय दिया गया। शून्यकाल में उनकी भागदारी 55% रही। किसको बोलना है ये अधिकार उस दल के नेता का है। जब आप खुद नहीं बोलना चाहते तो कोई क्या कर सकता है, लेकिन बोलने तो नियमों के अनुसार ही पड़ेगा।

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