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छात्र आंदोलनों पर सियासत तेज: आदित्य ठाकरे का बड़ा ऐलान

NEET और अन्य प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में हुए छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के खिलाफ आंदोलन में भाग लेने के कारण कानूनी कार्रवाई की जा रही है, उनकी पार्टी उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी।

मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए आदित्य ठाकरे ने केंद्र और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारों पर छात्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र अपने अधिकारों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

"नोटिस मिले तो हमें भेजें, मुफ्त में लड़ेंगे केस"

आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार की ओर से पहले यह आश्वासन दिया गया था कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा, लेकिन कई राज्यों में अब भी छात्रों को नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।

उन्होंने कहा, "पिछले दस दिनों से देशभर में युवा छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी बात रख रहे हैं। यह आंदोलन व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर था। हमें बताया गया था कि एफआईआर वापस ली जाएंगी, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा। शिवसेना (यूबीटी) ने फैसला किया है कि जिन छात्रों को कानूनी सहायता की जरूरत होगी, हम उनके मुकदमे बिना किसी फीस के लड़ेंगे। यदि किसी छात्र को नोटिस मिलता है तो वह हमें भेज सकता है।"

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से भी मांग की कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को तत्काल वापस लिया जाए और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

MH-CET को लेकर भी उठाए सवाल

आदित्य ठाकरे ने केवल NEET और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का ही मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि महाराष्ट्र की MH-CET परीक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की परीक्षा प्रणाली में भी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाने और छात्रों की चिंताओं का समाधान करने की मांग की। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

इस बीच, छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किए। अदालत ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के उन सभी छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

छात्रों पर फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार अपनी जांच जारी रख सकती हैं, लेकिन छात्रों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में जांच के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण सबूत के साथ छेड़छाड़ न हो।

स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत

सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि छात्रों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और प्रथम दृष्टया पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की आवश्यकता दिखाई देती है।

कोर्ट ने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल दोष तय करना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया है, तो उसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

छात्र आंदोलन बना राष्ट्रीय मुद्दा

NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विभिन्न विपक्षी दल खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आ रहे हैं, जबकि सरकार परीक्षा सुधारों और नए कानूनों के जरिए व्यवस्था को मजबूत करने की बात कह रही है।

एक ओर संसद में परीक्षा सुधार संबंधी विधेयकों पर चर्चा चल रही है, तो दूसरी ओर अदालतों में पुलिस कार्रवाई और छात्रों के अधिकारों को लेकर सुनवाई जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीति, शिक्षा और न्यायिक व्यवस्था के केंद्र में बना रहने की संभावना है।

फिलहाल छात्रों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आदित्य ठाकरे की मुफ्त कानूनी सहायता की घोषणा ने आंदोलन से जुड़े युवाओं को एक नया सहारा दिया है, जबकि सरकार पर भी जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है।