केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि एक तरफ RSS प्रमुख मोहन भागवत ज्यादा बच्चे पैदा करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार की योजना में तीन से ज्यादा बच्चों वाले परिवारों को लाभ नहीं देने की शर्त रखी गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस स्थिति में आम हिंदू असमंजस में है कि आखिर उसे क्या करना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा कि मोहन भागवत जी कह रहे हैं कि हर हिंदू को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए, जबकि रेखा गुप्ता जी कह रही हैं कि तीन से ज्यादा बच्चे होने पर दिल्ली लक्ष्मी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि रेखा गुप्ता और मोहन भागवत को मिलकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि लोगों को किस नीति का पालन करना चाहिए। केजरीवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
दरअसल, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में एक कार्यक्रम में घटती जनसंख्या और जनसांख्यिकी बदलाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि समाज में जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए परिवारों को कम से कम तीन बच्चों के बारे में विचार करना चाहिए।
भागवत के इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे और इसे जनसंख्या नीति से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बनाया था।
दूसरी ओर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने महिलाओं के लिए ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।
हालांकि, योजना के नियमों में शर्त रखी गई है कि इसका लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनके तीन या उससे कम बच्चे हैं। इसी शर्त को लेकर आम आदमी पार्टी ने BJP और RSS पर निशाना साधा है।
आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि एक तरफ RSS सामाजिक स्तर पर ज्यादा बच्चों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ BJP सरकार की योजनाओं में बच्चों की संख्या को लेकर सीमा तय की जा रही है।
AAP का आरोप है कि BJP और RSS के विचारों में तालमेल नहीं है और इसका असर आम लोगों के बीच भ्रम के रूप में दिखाई दे रहा है।
केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में BJP की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जनसंख्या नीति और सरकारी योजनाओं की पात्रता को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार और संघ पर सवाल उठा रहा है, जबकि BJP की ओर से अपने पक्ष में जवाब आने का इंतजार है।