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जापान की पीएम सानाए ताकाइची को पीएम मोदी ने कहा 'छोटी बहन'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ संयुक्त प्रेस बयान में उन्हें अपनी 'छोटी बहन' बताया। उन्होंने कहा कि ताकाइची की यह भारत की पहली यात्रा है और जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री का स्वागत करना खुशी की बात है।

मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसे का रिश्ता लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि बैठक में निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, तकनीक, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने कई नई पहल पर सहमति बनाई है, जो रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगी।

ताकाइची का प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहला भारत दौरा है। वह तीन दिन की यात्रा पर हैं और 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा ले रही हैं।    मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और जापान ने तेल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ऊर्जा सुरक्षा पर नई पहल शुरू की है। उन्होंने कहा कि दोनों देश बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

मोदी ने कहा कि भारत और जापान आर्थिक सुरक्षा को साझा सुरक्षा और ऊर्जा परिवर्तन को साझा अवसर मानते हैं। इसी दिशा में दोनों देशों ने इंडिया-जापान नेक्स्ट-जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया है।    मोदी ने कहा कि भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैटेरियल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा।

पीएम ने बताया कि दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी कई अहम फैसले किए हैं। इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के तहत भारत में 1000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्लांट लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे गोबरधन योजना को मजबूती मिलेगी और गांवों में टिकाऊ विकास, समृद्धि और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।   मोदी ने कहा कि आज के वैश्विक अस्थिर माहौल में आपसी भरोसा सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है और भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है।

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ऑटोमोबाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक कई क्षेत्रों में जापान ने भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दोनों देशों के बीच दोस्ती और भरोसे का मजबूत रिश्ता बना है। प्रधानमंत्री ताकाइची की भारत यात्रा के साथ भारत-जापान की स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप का नया अध्याय शुरू हो रहा है।

भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके।  अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्रा में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी।

इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।   स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है।

यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई।

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