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एसएमएस अस्पताल की मेडिकल इमरजेंसी में आधे घंटे ठप रही सेवाएं, एचओडी की फटकार के बाद रेजीडेंट डॉक्टरों ने छोड़ा काम

जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल की मेडिकल इमरजेंसी में गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब विभागाध्यक्ष (एचओडी) की ओर से औचक निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में खामियां मिलने पर रेजीडेंट डॉक्टरों को टोका गया। एचओडी की टिप्पणी से नाराज रेजीडेंट डॉक्टरों ने अचानक काम बंद कर दिया और विरोध जताते हुए सीधे प्रिंसिपल के चैंबर पहुंच गए। इस घटनाक्रम के कारण करीब आधे घंटे तक मेडिकल इमरजेंसी की सेवाएं प्रभावित रहीं और इलाज के लिए पहुंचे मरीजों एवं उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार पूरा मामला दोपहर करीब एक बजे का है। मेडिकल इमरजेंसी विभाग के एचओडी डॉ. सतीश मीना नियमित औचक निरीक्षण के तहत इमरजेंसी वार्ड पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की पर्चियों पर कई मामलों में मरीजों का नाम दर्ज नहीं किया जा रहा था। इसे उन्होंने गंभीर लापरवाही मानते हुए मौके पर मौजूद रेजीडेंट डॉक्टरों को इस संबंध में टोका और आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए।

बताया जा रहा है कि एचओडी की इस टिप्पणी और फटकार को रेजीडेंट डॉक्टरों ने उचित तरीके से नहीं लिया। इससे नाराज होकर उन्होंने काम करना बंद कर दिया और सामूहिक रूप से मेडिकल विभाग के एचओडी डॉ. महेंद्र कुमार अग्रवाल के पास पहुंचे। वहां अपनी आपत्ति दर्ज कराने के बाद सभी रेजीडेंट डॉक्टर अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के चैंबर पहुंचे, जहां उन्होंने मेडिकल इमरजेंसी के एचओडी डॉ. सतीश मीना के व्यवहार और बातचीत के तरीके को लेकर विरोध दर्ज कराया।

रेजीडेंट डॉक्टरों के अचानक काम छोड़ने से मेडिकल इमरजेंसी की व्यवस्था प्रभावित हो गई। इस दौरान इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को इंतजार करना पड़ा और इमरजेंसी में सामान्य कार्यप्रवाह कुछ समय के लिए बाधित रहा। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को जल्द संभालने का प्रयास किया और वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने तत्काल दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया। उन्होंने पहले रेजीडेंट डॉक्टरों की बात सुनी और फिर मेडिकल इमरजेंसी के एचओडी डॉ. सतीश मीना को भी अपने चैंबर में बुलाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद प्रिंसिपल ने रेजीडेंट डॉक्टरों को मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए तुरंत काम पर लौटने के निर्देश दिए। इसके बाद रेजीडेंट डॉक्टर वापस मेडिकल इमरजेंसी पहुंचे और सेवाएं फिर से सामान्य हो सकीं।

मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मेडिकल इमरजेंसी के एचओडी डॉ. सतीश मीना ने कहा कि मरीजों की पर्चियों पर नाम दर्ज नहीं करना एक गंभीर प्रशासनिक और चिकित्सकीय त्रुटि है। उन्होंने बताया कि यदि किसी कारणवश मरीज की पर्ची गुम हो जाए या दूसरी पर्चियों के साथ मिल जाए तो मरीज की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में जांच, दवाइयों या उपचार से जुड़ी जानकारी प्रभावित हो सकती है और मरीज को गलत दवा या गलत उपचार मिलने का जोखिम भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से उन्होंने रेजीडेंट डॉक्टरों को सावधानी बरतने के लिए कहा था, लेकिन उनकी बात का गलत अर्थ निकाल लिया गया।

वहीं अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संवाद की कमी के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि रेजीडेंट डॉक्टरों को एचओडी का टोकने का तरीका अच्छा नहीं लगा, जबकि एचओडी का उद्देश्य केवल व्यवस्थाओं में सुधार करना था। उन्होंने डॉ. सतीश मीना को सलाह दी है कि भविष्य में रेजीडेंट डॉक्टरों से संवाद करते समय संयम और नम्रता बनाए रखें। साथ ही रेजीडेंट डॉक्टरों को भी स्पष्ट रूप से समझाया गया है कि इमरजेंसी जैसी संवेदनशील जगह पर किसी भी स्थिति में काम बंद करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे सीधे मरीजों की जान और उपचार प्रभावित हो सकता है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद स्थापित किया जाएगा। साथ ही मरीजों से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि उपचार व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश न रहे। फिलहाल बातचीत के बाद मामला शांत हो गया है और मेडिकल इमरजेंसी की सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।